पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नारवाणे ने अपनी नई किताब के विमोचन के अवसर पर कहा कि भारत की तत्काल सुरक्षा प्राथमिकता पाकिस्तान से जुड़ी हुई है, जिसका कारण वह वहां जारी आतंकवाद और उससे जुड़े खतरे को बताया। वहीं उन्होंने माना कि दीर्घकाल में चीन नए दिल्ली का मुख्य प्रतियोगी बनेगा और यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक व वाणिज्यिक आयामों तक फैलेगी।
नारवाणे ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि पाकिस्तान और चीन अलग तरह की चुनौतियाँ पेश करते हैं; दोनों के साथ अटल-सी सीमाएँ और पूर्व संघर्षों का इतिहास है, इसलिए वे हमेशा सुरक्षा एजेंडों पर रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को चीन के साथ मतभेदों का समाधान बातचीत व कूटनीतिक माध्यमों से करने का प्रयास करना चाहिए, परंतु कूटनीति की सफलता न होने पर मजबूत सैन्य प्रत्याशा आवश्यक है।
इसके अलावा नारवाणे ने पड़ोसी देशों—नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार—में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। उनके अनुसार इन देशों में अस्थिरता से शरणार्थी आना, तस्करी और अवैध हथियारों के प्रवाह जैसे प्रतिकूल प्रभाव भारत पर पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि शांति लक्ष्य होनी चाहिए, मगर उसे सुरक्षित रखने के लिए तत्पर सैन्य क्षमता भी जरूरी है।

संदर्भ स्रोतNDTV IndiaIndia Today NationABP News IndiaHindustan Times India
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