युवा आंदोलनों व सीजेपी के दबाव से मोदी सरकार घिरी
राहुल गांधी युवाओं से जुड़ कर उनकी समस्याओं, परेशानियों और समाधान को संसद में उठा मोदी सरकार तक पहुंचा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने छात्रों की गूंज कार्यक्रम शुरू किया है। इससे कांग्रेस के साथ युवा भारी तादाद में जुड़ रहे हैं। सबसे पहला कार्यक्रम राजस्थान के कोटा में आयोजित किया गया। ये बात बीजेपी शासित राज्यों को फूटी आंख नहीं सुहाई। उसके बाद जुलाई में ये कार्यक्रम १५ से २७ जुलाई तक देहरादून में आयोजित होना था इसके लिए प्रदेश कांग्रेस ने नगर निगम में परेड ग्राउंड की फीस एक लाख ७५ हज़ार रुपए जमा भी कर दिए थे। लेकिन ठीक एक दिन पहले नगर निगम ने ये कहते हुए परेड ग्राउंड रद्द कर दिया कि यहां पहले से सरकार का कार्यक्रम है। आप किसी अन्य जगह पर अपना कार्यक्रम करें।
यूपी में भी छात्रों की गूंज कार्यक्रम निरस्त
८ अगस्त को अल्लाहाबाद में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को प्रशासन ने अनुमति दे दी थी। लेकिन दो दिन पहले लाेकल प्रशासन ने ये कहते हुए कार्यक्रम रद कर दिया कि इस कार्यक्रम से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। इसके अलावा कांवरियो के लिए विशेष व्यवस्था करना पड़ रही है इसलिए कांग्रेस के कार्यक्रम को रद किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी युवाओं से मिलकर विशेष सत्र का आयोजन करने वाले थे। ऐसे में कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी शासित राज्यों में उनके कार्यक्रमों जानबूझ कर रोक लगा रहीं हैं। ये युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
देश में देखा जा रहा है कि केंद्र सरकार को मोर्चों पर जूझना पड़ रहा है। एक तरफ देश के युवाओं ने भविष्य के मुद्दों पर कई आंदोलन छेड़ रखे हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी के कॉल पर देशव्यापी आंदोलन छेड़ कर सरकार की नाक में नकेल कस रखी है। सीजेपी की मांग पर मोदी सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान का इस्तीफा ले लिया लेकिन हालात अब भी नियंत्रण में नहीं है हैं। सीजेपी ने फाउंडरअब गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफा मांगा है। अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि उनका सरकार की युवा विरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन जारी रहेगा।

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