संसद का मानसून सत्र खत्म, टीएमसी बागी सांसदों की सदस्यता पर संकट
मई में प बंगाल के चुनाव परिणाम आने के बाद से टीएमसी पार्टी के बुरे दिन शुरू हो गये। परिणाम आये और ममता बनर्जी के लिये परेशानियों का झमेला शुरू हो गया। पहले 28 सांसदों में 20 ने काकोली घोष के नेतृत्व में बागी हो गये और अनजान पार्टी एनसीपीआई में शामिल हो गये। इनमे ममता बनर्जी के सबसे करीबी सांसद यूसुफ पठान समेत दो तीन और सांसद भी टीएमसी से छिटक गये। टीएमसी से सांसद सायोनी घोष के जाने पर सबने हैरत जतायी जो ममता दीदी की सबसे करीबी मानी जाती थीं। विधानसभा चुनाव के परिणाम आते ही 80 विधायकों मे 65 एमएलए पार्टी से बगावत कर अलग हो गये। बाकी विधायक फिलहाल ममता दीदी के साथ हैं लेकिन कब तक यह नहीं कहा जा सकता है। बागी विधायक अपने को असली टीएमसी बता कर चुनाव आयोग पहुंच और टीएमसी के चुनाव चिह्न औश्र झण्डे पर अपना हक जता रहे हैं। वहीं दूसरी ममता पूरी ताकत से अपनी पार्टी को बचाने मे जुटी हुई हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या तो उन लोकसभा सांसदों के लिये खड़ी दिख रही है जो ममता का साथ छोड़ एनडीए में शामिल हुए हैं। संसद का मानसून सत्र पूरा बीत गया लेकिन इन बीस सासंदों के भविष्य पर कोई फैसला लोकसभा अध्यक्ष बिडला ने नहीं लिया है। ऐसे में 20 सांसदों के भविष्य पर तलवार लटक रही है। जब से ये सांसदों ने पार्टी छोड़ एनडीए में शमिल हुए है तब से इन्हें केन्द्र के बड़े दिग्गज मंत्रियों ने साथ खड़े होने का वादा कर रखा है लेकिन लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला ने इन सांसदों के बारे में कोई निर्णय नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी से हड़कंप
सुप्रीमकोर्ट में पिछले तीन साल से उद्वव ठाकरे सरकार गिराने वाले मामले की सुनवायी चल रही है। पिछली सुनवायी में तीन सदस्यीय जजों की बेंच ने सुनवायी में सीजेआई सूर्यकांत समेत जॉयमाला बागची ने एक ऐसी टिप्पणी कर दी जिससे एनडीए सरकार और चुनाव आयोग की पेशानी पर शिकन आ रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विधायक या सांसद पार्टी छोड़ कर अलग पाटी बनाये या अन्य दल में जाये तो उसकी सदस्यता का फैसला पूर्व पार्टी अध्यक्ष कर सकता है। यह बात उन्होंने महाराष्ट्र की उद्वव ठाकरे सरकार को तोड़ कर महायुति सरकार बनाने वाले मामले की सुनवायी के दौरान की थी। अगर यह बात फैसले में दर्ज हो जाती है। तो शिंदे गुट की पार्टी सभी बागी विधायकों की सदस्यता पर गाज गिर सकती है। यह बात केवल शिंदे गुट के विधायकों पर ही नहीं लागू होगी बल्कि सांसदों पर भी लागू हो जायेगी। इसका असर केन्द्र की एनडीए सरकार पर भी पड़ेगा। इस मामले में सरकार के साथ चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठेंगे।
मोदी शाह के इशारों पर अनेक दलों तोड़ा गया
महाराष्ट्र में शिवसेना के अलावा शरद पवार की एनसीपी को भी ऐसे ही तोड़ा गया। शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने भी शिंदे की तरह एनसीपी के काफी विधायकों को अपने साथ कर एनसीपी को दो फाड़ कर दिये। वर्तमान में शरद पवार की एनसीपी के सात संसद सदस्य हैं। एक सदस्य अजित पवार एनसीपी का है। इसी साल भाजपा ने आप के सात राज्यसभा सदस्यों को तोड़ कर आम आदमी पार्टी को भारी झटका दिया है। मई में प बंगाल के चुनाव परिणाम के बाद 20 टीएमसी सांसदों को साम दाम दंड भेद कर अपने पक्ष मे कर लिया है। इससे पहले बिहार की लोजपा को भी भाजपा ने तोड़ कर दो हिस्सोंं में बांट दिया है। एक दल को रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान के पास है दूसरा दल पशुपति पारस के हिस्से में चला गया। इसके अलावा जेडीयू को भी तोड़ने का प्रयास किया गया। ये बात और है कि नितीश कुमार अपने आप ही भाजपा की झोली में गिर पड़े हैं।
पूर्व टीएमसी सांसद भविष्य को लेकर पसोपेश मे
हालात यह हैं कि ये सांसद संसद में तो किसी और पार्टी के हैं कि संसद के बाहर किसी और पार्टी माने जा रहे हैं। उधर दूसरी ओर ममता दीदी ने इन सांसदों के खिलाफ ओम बिड़ला को सदस्यता भंग करने का पत्र लिख दिया है। दरअसल टीएमसी के 20 सांसदों ने जिस पार्टी एनसीपीआई में सदस्यता ली है उसे कोई जानता भी नहीं है। इस बीच ये चर्चा चल रही है कि इनमे से कुछ सांसद पुरानी पार्टी टीएमसी में जाने की फिराक में हैं। ये सांसद संप्रदाय विशेष से आते हैं। उनका कहना है कि वो एनडीए में शामिल नहीं होंगे। उनकी सोच भाजपा की सोच से अलग है उनके साथ वो पही बैठने वाले हैं। उन्होंने टीएमसी इसलिये छोड़ी कि अपने संसदीय क्षेत्र का विकास कर सकेंं। लेकिन संसद के मानसून सत्र में भी उनकी सदस्यता का फैसला नहीं हुआ है।

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