मोदी की कुर्सी पर मंडराता खतरा, मंत्रियों की उल्टी गिनती शुरू हो गयी

पिछले एक दो माह से सरकार की सांसें उखडत़ी दिख रही हैं। चाहे वो युवाओं का आंदोलन हो या बेरोजगार की समस्या हो। नीट पेपर लीक का मामला हो, शिक्षा जगत में भ्रष्टाचार का मामला हो या जन सरोकारों से जुड़े मुददों पर सरकार की नजरअंदाजी से देश में माहौल सरकार के खिलाफ दिखने लगा है। ऐसे मेंं पीएम मोदी की कुर्सी पर भी खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में मोदी ने सरकार की छवि सुधारने के बारे में सोचना शुरू कर दिया। इसकी सुगबुगहाट से सीनियर मंत्रियों की भी समझ में आने लगी है। ऐसे में पिछले में महीने ही सीजेपी और राहुल गांधी की हठ के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने पर मजबूर किया गया। इसके बाद अब सरकार में दिग्गज नेता और मंत्री नितिन गडकरी ने जनसभा में साफ कर दिया है कि अब उनमें मंत्री पद संभालने का ताकत नहीं है। अब युवाओं को आगे करने का वक्त आ गया है। वैसे भी नरेंद्र मोदी और गडकरी के बीच छत्तीस का आंकड़ा जग जाहिर है। चर्चा इस बात की है कि पीएमओ से यह जानकारी गडकरी को मिल गयी कि आप अपना बोरिया बिस्तर बांध लो। इसी में आपकी भलाई है।

76 साल के पीएम और 69 साल के गडकरी थक गये!

गडकरी के इस बयान ने एक चर्चा को हवा दे दी कि जब 76 साल के नरेंद्र मोदी पीएम के पद पर बने रहना चाहते हैं तो उनसे 7 साल छोटे नितिन गडकरी अपनी उम्र का बहाना क्यों बना रहे हैं। ये भी चर्चा कि नितिन गडकरी संघ के काफी करीबी हैं साथ ही पीएम पद के सबसे प्रबल दावेदार भी बताये जाते थे। अचानक उन्होंने सक्रिय राजनी​ति से संन्यास लेने की बात क्यों कर दी है। शायद ये सब इसलिये इस लिये किया जा रहा है कि पीएम पद की रेस में मोदी किसी को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। वैसे पीएम ने इशारों इशारों में यह संदेश राजनाथ सिंह, अमित शाह, निर्मला सीतारमन, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, गिरिराज सिंह, शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर को दिया है कि उड़ान का वक्त तय हो गया है मंत्रीगण अपनी पेटियां बांध लें। वैसे भी 12 सालों में सरकार के मंत्रियों ने केवल पीएम मोदी की जयजयकार ही करी है। पीएम मेहरबानी पर किसी सांसद को मंत्रीपद उपहार में दिया जाता रहा है। क्यों कि मंत्री किसी भी विभाग का हो उसके करने के लिये कुछ नहीं होता है। विभाग का सारा काम पीएमओ ही देखता है। जो कुछ भी देश में बदहाली और भ्रष्टाचार का पहाड़ बना है उसके लिये सिर्फ पीएम और उनके अधीनस्थ ब्यूरोक्रेट्स की जिम्मेदार है। ये बात अब सरकार और मंत्रियों को समझ में आने लगी है।

गाज तो अमित शाह पर भी गिर सकती है

अब चर्चा यह भी चल रही है कि जिन मंत्रियों पर गाज गिरनी है उसमें मोदी के सबसे खास अमित शाह का नाम भी आ रहा है। उसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि जुलाई माह में सीजेपी के आंदोलन के दौरान जो पुलिस ने बर्बरता दिखायी वो विभाग शाह का है। दिल्ली पुलिस की इस बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज की गूंज न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में सुनायी दे रही है। इससे पीएम मोदी को भी युवाओं के गुस्से का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।जंतर मंतर पर युवाओं ने धर्मेद्र प्रधान के साथ पीएम मोदी को निशाने पर रखा और उनके इस्तीफे की मांग भी कर डाली थी। मोदी सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन अपनी छवि धूमिल होने का खतरा मोल नहीं ले सकते है।

सदन में आने से घबरा रहे हैं विश्वगुरू

जब से तीसरी बार नरेंद्र मोदी ने पीएम पद संभाला है तभी से सरकार पर से मोदी शाह का असर कम दिखने लगा है। पिछले दस सालों तक मोदी शाह ने ​देश को जिस तरह हांकना चाहा वो हांकते रहे। लेकिन अब लगता है कि पीएम मोदी का जादू अब फीका पड़ रहा है। दस सालो तक विपक्ष की कोई हैसियत नहीं ​थी कि वो सरकार का विरोध कर सकता। दस साल तक नेता प्रतिपक्ष संसद के दोनों सदनोंं में विपक्ष का पद खाली रहा। लेकिन 2024 मेंं भाजपा के इरादों को विपक्ष ने कड़ी टक्कर देते हुए उनको घुटनों पर ला दिया। सरकार के मंसूबों पर पानी फिर गया। पहली बार नरेंद्र मोदी को बैसाखी सरकार चलानी पड़ रही है जिसके मोदी आ​दी नहीं है। वर्तमान हालात यह हैं कि सरकार के पैरों में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लाक ने घुटनों पर ला दिया है। पिछले दस सालों में सरकार और भाजपा में सत्ता का अहंकार इतना हो गया कि वो किसी भी विपक्ष के नेता खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से चूकते नहीं है। इसमें सरकार के साथ देश का प्रमुख मीडिया हाथ बांधे खड़ा दिख रहा है। ऐसे में मीडिया ने जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना ही बंद कर दिया। दिन भर टीवी चैनलों पर मोदी सरकार की उपलब्ध्यिों की डुगडुगी बजाना ही मेन मीडिया का काम रह गया है। हाल ही में संसद के मानसून सत्र में जिस तरह से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक ने सरकार की बखिया उधेड़ डाली उससे मोदी शाह इतने भयभीत दिखे कि पूरे सत्र सदन में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।

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