टूटने को है यूपी में एनडीए, योगी के खिलाफ घेराबंदीचुनाव पूर्व यूपी में एनडीए के अंदर खींचातान शुरूसरकार के मंत्री खुद धरने पर बैठे#UPCMissues #UPgovt.indisputes NDAVsINDIA #Akhileshyadav #Rahulgandhi यूपी सरकार और पुलिस की मनमानी से तंग आ कर सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद योगी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गये हैं इस बात से साफ हो रहा है कि यूपी एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं है। आल इस नॉट वेल है। हाल में ही गोंडा में निषाद जाति के नेता विनोद सहनी की नृशंस हत्या कर दी गयी। लेकिन लोकल पुलिस और प्रशासन ने इस मामले पर कोई संतोष जनक कार्रवाई नहीं की। इससे निषाद पार्टी के अंदर रोष व्याप्त है। निषाद पाटी कार्यकर्ताओं ने यह आरोप लगया है कि स्थानीय प्रशासन हत्यारोपियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवावाई नहीं कर रहे हैं। यह भी आरोप है कि आरोपियों का बीजेपी के बड़े नेताओं से है। ऐसे में पुलिस पकड़ धकड़ में दिलचस्पी नही ले रहे हैं। इसके अलावा एनडीए के अन्य घटकों में अपना दल और सुभासपा के कार्यकर्ताओं में इस बात से गुस्सा है कि सरकारी अफसर और पुलिस उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करते हैं। एनडीए के घटक दल पाला बदलने की फिराक में जैसे जैसे यूपी का विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है यूपी के अंदर राजनीतिक खिचड़ी पकने लगी है। ये भाजपा के लिये चिंताजनक बात है एक तरफ योगी सरकार को राहुल अखिलेश हर मामले में घेरते दिख रहे हैं तो दूसरी ओर युवाओं में रोजगार को लेकर सरकार के प्रति गुस्सा दिख रहा है। इसके अलावा महंगाई के मुद्दे पर जनता में आक्रोश है। योगी और सरकार इंडिया ब्लाक के निशाने पर है। सबसे बुरी बात तो यह है कि सरकार के मंत्री भी सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। सरकार के घटक दल भी योगी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। यूपी सरकार पर यह आरोप लग रहा है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बल पर सत्ता में काबिज बनी रहना चाहती है। अफसरों और पुलिस की मनमानी चरम पर है। यूपी एनडीए सत्ता का खेल खत्म घटक दल चौकन्ने!ऐसा लग रहा है कि यूपी चुनाव के पहले एनडीए के घटक दल सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं। वैसे भी ये दल सिर्फ सत्ता का सुख पाने के लिये ही एनडीए में हैं। इसके लिये वो अपनी साख बनाये रखने के लिये कुछ भी निर्णय ​ले सकते हैं। सुभासपा अपना दल और निषाद पार्टी तब तक एनडीए क साथ है जब तक यूपी व केन्द्र में भाजपा सत्ता में है। ये छोटे छोटे दल सत्ता की मलाई काटने के लिये ही एनडीए में शामिल हुए हैं। वैसे भी सीएम योगी पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वो घटक दलों के विधायकों से मिलने में दिलचस्पी नहीं रखते हैं। मंत्रियों तक शिकायत रहती है कि अधिकारी और पुलिस उनकी बात पर कार्रवायी नहीं करते हैं। इस बात से गुरेज नहीं किया जा सकता है कि योगी के डिप्टी सीएम भी सरकार के रवैये से खुश नहीं हैं। यही वजह रही कि 2024 के आम चुनाव में भाजपा को भारी हार का सामना करना पड़ा। यूपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से भी योगी के रिश्ते मधुर नहीं हैं। योगी के नेतृत्व चुनाव लड़ने की बात तो कही जा रही है लेकिन तीसरी बार योगी सीएम बनेंगे इस पर शीर्ष नेतृत्व साफ नहीं कर रहा है।

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