हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट पहुंचीं मेधा रूपमWhy SG Tushar Mehta defending Medha Roopam in CourtVinay Goel
नोयडा की डीएम मेधा रूपम हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट पहुंच गयी हैं। इस समय मेधा रूपम न्यूजकेक बनी हुई हैं। वैसे भी मेधा रूपम को विवाद में रहने की आदत है। लेकिन इस बार उनका गुरूर टूट गया है। मेधा रूपम को इस बात का घमंड है कि वो मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी हैं तो उन पर कोई ऐक्शन नहीं लिया जायेगा लेकिन उनका यह गुरूर भी इस बार इलाहाबाद कोर्ट के नामचीन जज अतुल श्रीधरन तोड़ कर रख दिया। श्रीधरन ने मेधा रूपम को इस तरह फटकारा कि उनका घमंड चूर चूर हो गया। जज ने कहा कि डीयू की छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ डीएम ने एनएसए का मुकदमा दायर करने की बहुत बड़ी गलती की है। सरकार के समर्थन में मुकदमा दायर कर यह साबित कर दिया कि उन्होंने अपने विवेक का इस्तेमाल नही किया और एनएसए का मुकदमा दर्ज कराया। जज ने न केवल छात्रा के रिहाई के आदेश दिये बल्कि प्रशानिक अधिकारियों के साथ डीएम के खिलाफ सर्विस रिकार्ड में टिप्पणी दर्ज करने का आदेश भी दिया है। इसके साथ 5 लाख रूपये का जुर्माना भी अपने वेतन से भरने का आदेश भी दिया। इसी बात को लेकर मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट पहुंख् गयी हैं। उनकी तरफ से केस लड़ने के लिये सरकारी वकील एसजी तुषार मेहता को जिम्मेदारी मिली है। इस बात को लेकर भी चर्चा हो रही है कि आखिर ऐसी कौन से वजह है कि नोयडा डीएम मेधा रूपम को बचाने को सरकारी वकील क्यों लगाया गया है।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोयडा डीएम के कन्ने कसे नोयडा की डीएम के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा ही सख्त कदम उठाते हुए पांच लाख का जुर्माना ठोक दिया है। ये डीएम कोई साधारण आइएएस नहीं हैं ये मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता की बेटी मेघा रूपम हैं।वैसे साधारण तौर पर देखा जाता है कि अदालतें अक्सर सत्ता के करीबी लोगों के प्रति नरम रवैया अपना लेते हैं। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर जज अतुल श्रीधरन ने डीएम की मनमानी पर सख्ती बरती औरम आदेश दिया कि नोयडा की एक छात्रा आकृति चौधरी को सिर्फ मजदूरों को उनके हक की लड़ाई के लिये एनएसए जैसे गंभीर मामले में बिना सुबूतों के मुकदमा करा दिया और उसे महिनों तक जेल में रखा। जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो जज श्रीधरण बिफर गये और उन्होंने डीएम मेघा रूपम को लताड़ लगाते हुए छात्रा की रिहाई के आदेश दिये और उन पर पांच लाख का जुर्माना भी ठोक दिया।ये बात यूपी और केन्द्र की मोदी सरकार को हजम नहीं हुई और मेधा के बचाव के लिये सालिसीटर जनरल तुषार मेहता को उतार दिया है। इस बात से समझ में आ गया कि ज्ञानेश कुमार उनके लिये कितने अहम् हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त बीजेपी के चुनाव जीतने के लिये एसआईआर के जरिये ग्राउन्ड तैयार कर रहे हैं। ऐसे में उनकी बेटी को बचाने की जिम्मेदारी तो बनती है।
नोयडा की डीएम मेधा रूपम हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट पहुंच गयी हैं। इस समय मेधा रूपम न्यूजकेक बनी हुई हैं। वैसे भी मेधा रूपम को विवाद में रहने की आदत है। लेकिन इस बार उनका गुरूर टूट गया है। मेधा रूपम को इस बात का घमंड है कि वो मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी हैं तो उन पर कोई ऐक्शन नहीं लिया जायेगा लेकिन उनका यह गुरूर भी इस बार इलाहाबाद कोर्ट के नामचीन जज अतुल श्रीधरन तोड़ कर रख दिया। श्रीधरन ने मेधा रूपम को इस तरह फटकारा कि उनका घमंड चूर चूर हो गया। जज ने कहा कि डीयू की छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ डीएम ने एनएसए का मुकदमा दायर करने की बहुत बड़ी गलती की है। सरकार के समर्थन में मुकदमा दायर कर यह साबित कर दिया कि उन्होंने अपने विवेक का इस्तेमाल नही किया और एनएसए का मुकदमा दर्ज कराया। जज ने न केवल छात्रा के रिहाई के आदेश दिये बल्कि प्रशानिक अधिकारियों के साथ डीएम के खिलाफ सर्विस रिकार्ड में टिप्पणी दर्ज करने का आदेश भी दिया है। इसके साथ 5 लाख रूपये का जुर्माना भी अपने वेतन से भरने का आदेश भी दिया। इसी बात को लेकर मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट पहुंख् गयी हैं। उनकी तरफ से केस लड़ने के लिये सरकारी वकील एसजी तुषार मेहता को जिम्मेदारी मिली है। इस बात को लेकर भी चर्चा हो रही है कि आखिर ऐसी कौन से वजह है कि नोयडा डीएम मेधा रूपम को बचाने को सरकारी वकील क्यों लगाया गया है।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोयडा डीएम के कन्ने कसे नोयडा की डीएम के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा ही सख्त कदम उठाते हुए पांच लाख का जुर्माना ठोक दिया है। ये डीएम कोई साधारण आइएएस नहीं हैं ये मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता की बेटी मेघा रूपम हैं।वैसे साधारण तौर पर देखा जाता है कि अदालतें अक्सर सत्ता के करीबी लोगों के प्रति नरम रवैया अपना लेते हैं। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर जज अतुल श्रीधरन ने डीएम की मनमानी पर सख्ती बरती औरम आदेश दिया कि नोयडा की एक छात्रा आकृति चौधरी को सिर्फ मजदूरों को उनके हक की लड़ाई के लिये एनएसए जैसे गंभीर मामले में बिना सुबूतों के मुकदमा करा दिया और उसे महिनों तक जेल में रखा। जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो जज श्रीधरण बिफर गये और उन्होंने डीएम मेघा रूपम को लताड़ लगाते हुए छात्रा की रिहाई के आदेश दिये और उन पर पांच लाख का जुर्माना भी ठोक दिया।ये बात यूपी और केन्द्र की मोदी सरकार को हजम नहीं हुई और मेधा के बचाव के लिये सालिसीटर जनरल तुषार मेहता को उतार दिया है। इस बात से समझ में आ गया कि ज्ञानेश कुमार उनके लिये कितने अहम् हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त बीजेपी के चुनाव जीतने के लिये एसआईआर के जरिये ग्राउन्ड तैयार कर रहे हैं। ऐसे में उनकी बेटी को बचाने की जिम्मेदारी तो बनती है।
—बार देखा गया
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