काश संवैधानिक पदों पर बैठे लोग पहले जग जाते!

सुप्रीम कोर्ट का एसजी और सरकार को मुंह तोड़ जवाब

Vinay Goel

देश में हालात दिख रहे हैं ऐसे में अदालतों का रुख बदलता नजर आने लगा है। ऐसा माना जा सकता है कि इन लोगों को अपनी छवि का ख्याल हो गया है। सुप्रीमकोर्ट से ऐसे संकेत आने लगे हैं कि देश में सत्ता के खिलाफ आवाज बुलंद करने की हिम्मतआदो आ गयी है। पिछले कुछ महीनों से सुप्रीम कोर्ट के जजों ने ऐसा करने की हिम्मत दिखानी शुरू कर दी है। ताजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् के मामले में सुनवायी करते हुए सरकार के वकील तुषार मेहता को जबरदस्त लताड़ लगायी। साथ ही में यह कह दिया कि सरकार देश में किसी को वंदे मातरम् गाने के लिये बाध्य नहीं कर सकती है। वंदे मातरम् को लेकर देशव्यापी आंदोलन चल रहा है सरकार ने इसको लेकर बिल तो पास करा लिया लेकिन अभी भी विपक्ष इसके खिलाफ सरकार को घेरने में एकजुट है। ऐसे में सरकार की मनमानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जो बात सीजेआई ने कह दिया ​उससे लगता है कि अब संविधान की रक्षा करने के लिये अदालतों का रुख भी बदलने लगा है। उम्मीद ​की जा रही है कि बदलते माहौल में सरकार के दबाव में रहने वाली संस्थाएं और पदाधिकारी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष हो कर काम करने लगें। चर्चा चल रही है कि काश देश की संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इससे पहले जागरूक होते तो देश की हालात इतने बुरे नहीं होते

देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार हुआ कि एक सीजेआई​ रिटायर होने के कुछ दिनों बाद ही सरकार की ओर से राज्यसभा का सदस्य बना दिया गया। इस बात की देश में काफी आलोचना हुई। देश के पूर्व सीजेआई समेत प्रबुद्ध वर्ग और राजनयिकों ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जतायी थी। रिटायर होने से पहले सीजेआई रंजन गोगोई ने बाबरी मस्जिद और राम मंदिर मामले में महत्वपूर्ण फैसला कर सरकार को अप्रत्यक्ष रूप से मदद की थी। उस फैसले से बीजपी और सरकार को राजनीति चमकाने में काफी सहूलियत हुई। 2020 में दिये गये फैसले में सुप्रीमकोर्ट के पांच जज शामिल थे। जिनमे रंजन गोगोई समेत अशोक भूषण, डीवाई चंद्रचूढ़, अब्दुल ए एस नजीर और ए एस बोबड़े शामिल थे। केवल एएस बोबड़े के अलावा चारों जजों को सरकार ने तोहफों से नवाजा है। अशोक भूषण को एनसीएलटी का अध्यक्ष बनाया, अब्दूल एस नजीर को राज्यपाल बनाया गया। डीवाई चंद्रचूढ़ बाद में सीजेआई बने। चंद्रचूढ़ दो साल सीजेआईक पद पर रहे। इस पीरियड में उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल की। चाहे वो चुनावी चंदे का मामला हो या शबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला, मीडिया में उनका नाम सुर्खियों में बना रहा। लेकिन कार्यकाल के अंतिम दो तीन माह में उनका भी असली चेहरा सामने आ गया उनके घर पर पीएम मोदी गणेश पूजन करने पंहुच गये। तब सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया।

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