समूचे विपक्ष ने सीईसी को निशाने पर लिया गिरफ्तारी की मांग

देश में एक बार फिर सच्ची और साहसी पत्रकारिता जगत में इंडियन ऐक्सप्रेस की महिला पत्रकार ने बाजी मार ली है। पहले की तरह यह साबित हो गया कि अभी भी पत्रकारिता जगत में इंडियन एक्सप्रेस बेताज बादशाह है। इंडियन एक्सप्रेस की रितिका चोपड़ा की ताजा खोजी रिपोर्ट देश की सत्ता और मुख्य चुनाव आयुक्त की लंंका लगा ​दी है। उनकी इस सनसनीखेज पत्रकारिता से पता चलता है कि किस तरह से सत्ता को बरकार रखने के लिये मुख्य चुनाव आयुक्त मनमाने ढंग से देश में रह रहे वोटरों का नाम लिस्ट कटवा रहे हैं। अब तक सीईसी ज्ञानेश कुमार ने भाजपा सरकार की जीत को सुनिश्चित करने के लिये एसआईआर कर 13 करोड़ वोट कटवाये और कई प्रदेशों में भाजपा की सरकार बनाने में अहम् भूमिका निभाई है। इस रिपोर्ट से ये भी साबित हुआ कि किस तरह ज्ञानेश कुमार दो अन्य चुनाव आयुक्त की बात को अनसुना कर सरकार के पक्ष में सारे निर्णय लेते रहे हैं। इस रिपोर्ट के सामने आते ही सारा विपक्ष एक सुर में ज्ञानेश कुमार की हरकतों पर खासा नाराज दिख रह है। इस मामले में पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार की मनमानी को संगीन अपराध बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। इस​के अलावा एलओपी राहुल गांधी ने कहा कि वो पहले से ही चुनाव आयोग की मनमानी पर सवाल उठाते रहे है। सांसद संजय राउत, संजय सिंह, आप संयोजक अरविंद केेजरीवाल एमके स्टालिन, कनिमोझी,सीपीएम, अखिलेश यादव ने सामूहिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग कर रहे है। ये मामला तब सामने आया है जबकि यूपी समेत पांच राज्यों में चुनाव अगले साल होने हैं। भाजपा के लिये एक बड़ी समस्या बतायी जा रही है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का आरोप

विपक्ष पहले ही वर्तमान के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का आरोप विपक्ष और लोग लगा रहे हैं। उनसे एसआईआर में की गयी घपलेबाजी और मोदी सरकार के साथ मिलकर चुनाव आयोग में भ्रष्टाचार करने के आरोप लग रहा है। एक तरफ सरकार ने ज्ञानेश कुमार से दूरी बना ली है वहीं भाजपा ज्ञानेश कुमार के बचाव में उतार दी गयी है। चर्चा है कि मोदी सरकार ने बीईसी ज्ञानेश कुमार का जितना उपयोग करना था कर लिया अब वो उनके साथ खड़ी होती नहीं दिख रही है। इससे पहले भी पूर्व सीईसी राजीव कुमार पर भी सत्ता पक्ष के साथ खड़े होने का आरोप लग चुका है। लेकिन ज्ञानेश कुमार ने सारे रिकार्ड तोड़ते हुए मोदी सरकार के लिये राजनीतक बिसात पर चालें चलना शुरू कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार ज्ञानेश कुमार ने आयोग के अन्य चुनाव आयुक्तों एसएस संधू और विवेक जोशी को भी नजर अंदाज करते हुए संवैधानिक नियमों को दर किनार करते हुए एसआईआर कराये। जिसका फायदा भाजपा को बिहार और प बंगाल के चुनावों में हुआ।

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