विपक्ष के जाल में फंस गये मोदी शाह!
पिछले कई माह से देखा जा रहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार नित नये झंझटों में उलझती जा रही है। देश में आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं। सरकार इन समस्याओं से कैसे निपटे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। पिछले चार माह में देश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। हालात यह हैं कि सरकार का खजाना कंगाली के कगार पर कर्मचारियों के वेतन के भी लाले पर रहे हैं। यह भी चर्चा में है कि भारत की आर्थिक हालात बांग्लादेश से भी खराब हो गये हैं। सरकार इस उधेड़ बुन में है कि किस तरह आर्थिक हालात सुधरें ऐसे में विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है। ताजा हालात एसआईआर और चुनाव आयोग की मनमानी को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन के दौर चल रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी को लेकर दो अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। मोदी सरकार अपनी साख बचाने के लिये हो सकता है कि ज्ञानेश कुमार को स्वत: इस्तीफा देने को कह सकती है। मोदी शाह सत्ता पर काबिज रहने के लिये कुछ भी कर सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि पीएम मोदी के हाथ में सीईसी को हटाने की पावर नहीं है। उन्हें सिर्फ संसद में महाभियोग के जरिये ही हटाया जा सकता है। ये तभी संभव हो सकता है जब संसद के दोनों सदनों में यह प्रस्ताव पारित हो जाये।
युवाओं के दबाव में आई केन्द्र की मोदी सरकार
जुलाई में भी सीजेपी ने सरकार की मनमानी के खिलाफ जंतर मंतर पर आंदोलन किया था। शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही वो आंदोलन खत्म किया था। दूसरी ओर विपक्ष की एकजुटता भी मोदी सरकार के लिये संकट पैदा कर रही है। समूचा इंडिया ब्लाक व विपक्ष ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और मोदी सरकार के निकम्मेपन को लेकर आंदोलन करता दिख रहा है। इसके आलावा देश का हर वर्ग सरकार की कार्यप्रणाली और नीतियों को लेकर आंदोलन कर रहा है चाहे वो बेरोजगारी का मामला हो, सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का मुद्दा हो या नीट परीक्षा पेपर लीक का मामला। सरकार का उदासीन रवैया सबकी आंखों में खटक रहा है। मोदी सरकार के 12 सालों की कार्यप्रणाली से जनता ऊब गयी है जुमलेबाजी से जनता का मोह खत्म हो गया है।
चुनाव आयोग की कारगुजारियों से जनता और विपक्ष में रोष
गोंचुनाव आयोग की मनमानी और सत्तारूढ़ दल की मिलीभगत को लेकर विपक्ष काफी समय से शिकायत कर रहा है लेकिन न तो चुनाव आयोग उनकी बात सुन रहा है और न ही अदालत में उनकी फरियाद सुनी जाती है। यह आरोप लगता है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सत्तारूढ़ दल के साथ हैं। या स्वार्थवश सत्ता के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। वर्तमान सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन चल रहे हैं। सत्ताधीशों ने पिछले 12 सालों में सभी संवैधानिक पदों पर ऐसे लोगों को बैठा दिया जो कि उनकी सोच के समर्थक हैं। सरकार की पूरी कोशिश है कि वो अदालतों में भी संघ और भाजपा की सोच वाले वकीलों को न्यायपालिका में शामिल करा दें। लेकिन कॉलोजियम के आगे उनकी चल रही पा रही है। इसके बावजूद न्यायपालिका में बहुत सारे लोग न्यायपालिका में घुसने में सफल हो गये है। चुनाव आयोग कार्यप्रणाली पर विपक्षी दल यह आरोप लगा रहे हैं कि चुनाव आयोग में भाजपा समर्थक अधिकारियों को आयुक्तों को तैनात कर दिया है जो सरकार के इशारों पर काम कर रहे है। इंडिनयन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने चुनाव आयोग में हो रहे घोटालों का खुलासा किया है उस रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह सरकार के इशारों पर एसआईआर के जरिये देश के 13 करोड़ लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया। इस रिपोट के छपने के बाद से देश भर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्ष और देशवासियों के निशाने पर आ गये हैं। जनता आंदोलन कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग कर रही है।

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