यूपी की राजनीति गरमाने जा रही पूर्व आईएएस दिव्या मित्तलउत्तर प्रदेश में राजनीतिक तापमान बढ़ने लगामंगलवार को पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने ऐसा बयान दे कर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। हर किसी की जुबां पर एक ही चर्चा है कि क्या दिव्या मित्तल यूपी की राजनीति में बदलाव ला पायेंगी या घाघ राजनेताओं की मक्कारी का शिकार हो जायेंगी। जैसे ही दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्होंने वो प्रदेश की सक्रिय राजनीति में उतर रही हैं। विदेश से पढ़ कर भारत में प्रशासनिक अफसर बनने वाली दिव्या मित्तल ने अपनी सर्विस में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह कर अपनी निष्पक्षता और इमानदारी से जनता के बीच अच्छी छवि बनायी है। उन्होंने प्रशासनिक पद से इस्तीफा दे कर सक्रिय राजनीति में उतरने का निर्णय लिया है। अभी वो जिस जोश और उत्साह के साथ मीडिया में अपने इंटरव्यू दे रही हैं। उनके निशाने पर अभी मौजूद दलों पर रखा है। उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो राजनीति में कुछ कर गुजरने का जज्बा रखती हैं। ये तो समय बतायेगा कि वो अपने मकसद में कितना कामयाब होंगी। दिव्या को कितनी सफलता मिलेगी यह समय बतायेगाफिलहाल अभी यह खुलासा नहीं किया है कि वो किसी राजनीतिक दल में शामिल या अपना कोई नया मोर्चा तैयार करने वाली है। फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में वो अपनी किसमत आजमा सकती है। लेकिन ये बात भी उतनी सच है कि सिर्फ इमानदारी से आज के समय में राजनीति इत नी आसान नहीं है। कोई पुरानी राजनीतिक पार्टी नयी पार्टी को पैर जमाने नहीं देना चाहती है। खासतौर से जिसके पास न तो धन हो और न ही बाहुबल। विचारों में क्रांति और बदलाव की बातों से राजनीति में कुछ भी नहीं बनता है। आज के समय में वो नेता सफल हैं जो जाति और मजहब की बातों के सहारे अपनी राजनीति को चमका रह है। नेता जाति विशेष के लोगों के मसीहा बनने का दावा जरूर करते हैं लेकिन मौका मिलने पर सत्ता की मलायी सिर्फ उनके परिवार तक सीमित रहती है।मंत्री ओपी राजभर का बेतुका बया वायरलइसके तुरंत बाद यूपी सरकार में मंत्री ओपी राजभर का विवादित बयान सामने आ गया कि डीएम रह कर माल कमाया है तभी सक्रिय राजनीति में उतरने जा रही हैं दिव्या मित्तल वैसे भी सुभासपा अध्यक्ष ओपी राजभर अपने विवादित बयानों के लिये कुख्यात हैं। उनका साफ कहना है कि वो राजनीति में संत बनने नहीं आये हैं वो सरकार में रह कर मलाई काटने आये हैं। यूपी एनडीए सरकार में शामिल होने से पहले ओपी राजभर समाजवादी पार्टी में सहयोगी दल के रूप में थे। चुनाव बाद वो पाला बदल कर एनडीए में शामिल हो गये। फिलहाल वो कैबिनेट मंत्री है। पढ़े लिखे समझदार लोगों के सक्रिय राजनीति में उतरने से क्षेत्रीय दलों को ही सबसे पहले दिक्कत होती हैं। यह बात भी सही है कि आज भी देश में जाति और मजहब के आधार पर चुनावी मतदान होते हैं। गांव देहात में रहने वाले लोग आज भी इन दलों की चिकनी चुपड़ी बातों आ कर इनके लिये वोटिंग कर देते हैं।
—बार देखा गया
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