चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाह और टीडीपी ने भी आंखें तरेरी
ज्ञानेश कुमार प्रकरण से सरकार को संकट, एनडीए में भी भगदड़
लोजपा, आरएलएम और टीडीएम ने भी दिखायीं आंखें
पिछले साल ज्ञानेश कुमार ने राजीव कुमार की गद्दी संभाली थी। लोगों को लगा कि राजीव कुमार से बेहतर व निष्पक्ष और ईमानदार होंगे। लेकिन ज्ञानेश कुमार ने तो सभी सीमाएं लांघते हुए मोदी शाह की चाकरी करनी शुरू कर दी। लेकिन उनकी चालबाजी और साजिशें डेढ़ साल के भीतर सामने आ गयीं। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने पिछले डेढ़ साल में बिहार, प बंगाल, असम में चुनाव कराये जिसमें भाजपा की सरकारें बनीं तब से ज्ञानेश कुमार मोदी शाह की आंखों के तारे बने हुए है। वैसे भी ज्ञानेश कुमार शाह के करीबी हैं सहकारिता मंत्रालय में वो शाह के साथ काम कर चुके हैं। लेकिन पिछले आठ दस दिनों में ज्ञानेश कुमार की बेइमानी और मक्कारी की रिपोर्ट इंडियन ऐक्सप्रेस में छप गयी तभी से पूरे देश में यह चर्चा हो गयी कि चुनाव आयोग की मदद से मोदी शाह कैसे चुनाव जीत रहे हैं। सरकार और मोदी शाह ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है। मोदी शाह के लिये सबसे बड़ी चुनौती कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों है। उसके अलावा इंडिया ब्लाक तो पहले से ही मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं। ये चर्चा चल रही है कि मोदी शाह तब तक कोई बड़ा फैसला नहीं करते जब तक चुनाव की जीत पर सवाल उठने लगते हैं।
चिराग पासवान, चंद्रबाबू नायडू और उपेंद्र कुशवाह के सुर बिगड़े
ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सरकार को इशारा किया है कि चुनाव आयोग की छवि खराब हो रही तो सरकार और चुनाव आयोग को अपनी सफाई पेश करनी चाहिये। वहीं आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाह ने भी चिराग पासवान की बातों का समर्थन किया है। इसके अलावा मोदी सरकार के खास घटक टीडीपी ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता को बनाये रखने का सरकार पर दबाव बनाया है। अगर सरकार इस मामले कोई ठोस कदम नहीं उळामी हैतो सरकार के लिये परेशान की आशंका दिख रही है। वैसे भी सभी जानते हैं कि उपेंद्र कुशवाह चिराग पासवान और चंद्रबाबू नायडू सब के सब मोकापरस्त नेता है। वो किसी भी समय मौके पर चौका मार सकते हैं। ये बात मोदी शाह भी समझते है। ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष पहले से ही एसआईआर और वोटर लिस्ट में गड़बडी करने का आरोप लग रखा है। इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू में छपी खबरों से साफ हो गया कि विपक्ष जो आरोप रहा है उसमें सब कुछ सही है। एसआईआर के तहत अब तक 13 करोड़ लोगों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि 3 करोड़ लोगों के वोट काटने की चर्चा है।
ज्ञानेश कुमार के सितारे गर्दिश में, चुनाव आयोग में बगावत जारी
कभी ज्ञानेश कुमार ने सोचा भी न होगा कि उनके दिन इतने बुरे हो जायेंगे कि सारे देश में थू थू हो रही है। हर कोई उनके इस्तीफ को मांग रहा है। उन पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने मोदी शाह के इशारों पर देश के 15 करोड़ से अधिक लोगों का मताधिकार साजिश कर खत्म कर दिया। पूरा विपक्ष संसद से सड़क तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को वोट चोरी, सरकार चोरी और पार्टी तोड़ने का अभियुक्त बता रहा है। एक तरह पूरा विपक्ष और सीजेपी ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और इस्तीफा मांग रहा है वहीं दूसरी ओर भाजपा और उनके एक दर्जन मुख्यमंत्री ज्ञानेश कुमार के बचाव में कमर कस उतर चुके हैं। एक नेता ने तो बेशर्मी से सरकार से ज्ञानेश कुमार को पद्म विभूषण देने की मांग कर दी है। इससे साफ जाहिर हो गया कि चुनाव आयोग खुल्लम खुल्ला मोदी सरकार के लिये जीत के रास्ते बना रहा है। लेकिन चुनाव आयोग में की जा रही धांधलियों का खुलासा होने के बाद चुनाव आयोग के अंदर काफी कुछ विवादों का खुलासा हुआ। पहले सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानी की शिकायत कैबिनेट सचिव से की। उसके बाद महाराष्ट्र चुनाव आयोग के सीईओ एस जोकलिंगम ने ज्ञानेश कुमार और ईसीआईनेट की डीजी सीमा खन्ना की धांधलियों का खुलासा कर दिया। इससे जाहिर हो गया कि सरकार की शह पर ज्ञानेश कुमार और सीमा खन्ना ने लगभग 15 करोड़ वोटरों को मताधिकार को लिस्ट से बाहर कर दिया।

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