सरकार के से दो दो हाथ करने को तैयार है विपक्ष
क्या देश की जनता मोदी शाह की असलियत जान गयी!
सत्ता के लिये कुछ भी कर गुजरने का साजिशें रच रही सरकार
पीएम मोदी और शाह के आगे कुआं पीछे खाई जैसे हालात हो गये है। न हालात पर काबू है और न ही समस्याओं से उबरने का कोई रास्ता दिख रहा है। लेकिन इस बात का प्रयास किया जा रहा कि येन केन प्रकारेण सत्ता पर कब्जा बना रहे। आज के समय में भारत के सभी प्रदेशों में किसी न किसी मुद्दे पर उग्र आंदोलन और प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे लोगों को सत्ता समर्थक लोग देशद्रोही और गद्दार बता कर उन्हें बदनाम करने की साजिशें रच रहे हैं। उनके इस कुकृत्य में देश का प्रमुख मीडिया साथ दे रहा है।
सीजेपी के आगे सरकार क्यों झुुकती दिख रहे मोदी शाह
20 जुलाई को देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर काक्रोच जनता पार्टी ने शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिये बर्बरतापूर्ण कीलयुक्त लाठीचार्ज, पैलेटगन और अमानवीय व्यवहार किया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं और युवतियों के साथ अमानवीय बर्बरता की गयी। उनको सड़क पर घसीट कर लाठियों से बुरी तरह पीटा गया। इतना ही नही पुलिस अधिकारियों ने लडकियों के कपड़े तक फाड़े। इस मामले में एक आईपीएस अधिकारी संदीप लांबा पर गंभीर आरोप लगाये गये। एक इंसपैक्टर पर महिला के साथ अभद्र व्यवहार का आरोप लेकिन दो माह बाद भी सरकार ने इन आरोपी अफसरों और सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी। इस मामले को जब सुप्रीमकोर्ट में उठाया गया तो वहां भी निराशा हाथ लगी। सुप्रीमकोर्ट ने मामले के लिये एक जांच कमेटी गठित कर इतिश्री कर ली। इस बात को लेकर सीजेपी और इंडिया ब्लाक ने सरकार को संसद के मानसून सत्र में मोदी शाह को जमकर खरीखोटी सुनायी। इतिहास में पहली बार सत्र समापन में लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के अंदर धन्यवाद भी ज्ञापित नहीं किया। हालात यह रहा कि पीएम मोदी और अमित शाह पूरे सत्र के दौरान सदन मे आने की हिम्मत नहीं जुटा पाये।
बेशर्मी पर उतर गयी है दिल्ली पुलिस, प्रदर्शनकारियों पर कहर जारी
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिये बर्बरतापूर्ण कीलयुक्त लाठीचार्ज, पैलेटगन और अमानवीय व्यवहार किया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं और युवतियों के साथ अमानवीय बर्बरता की गयी। उनको सड़क पर घसीट कर लाठियों से बुरी तरह पीटा गया। इतना ही नही पुलिस अधिकारियों ने लडकियों के कपड़े तक फाड़े। इस मामले में एक आईपीएस अधिकारी संदीप लांबा पर गंभीर आरोप लगाये गये। एक इंसपैक्टर पर महिला के साथ अभद्र व्यवहार का आरोप लेकिन दो माह बाद भी सरकार ने इन आरोपी अफसरों और सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी। इस मामले को जब सुप्रीमकोर्ट में उठाया गया तो वहां भी निराशा हाथ लगी। सुप्रीमकोर्ट ने मामले के लिये एक जांच कमेटी गठित कर इतिश्री कर ली। जुलाई वाली पुलिस बेशर्मी और सरकार के अहंकार को अभी भी उस घटना से सबक नहीं लिया। दो अक्टूबर को जंतर मंतर पर छात्रों सामाजिक संगठनों और वकीलों ने जंतर मंतर और प्रोटेस्ट किया इस पर दिल्ली पुलिस एक बार फिर अपनी बेशर्मी और हैवानियत का प्रदर्शन किया और प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता और कहर ढाया। इस बार भी महिला प्रदर्शकारियों के साथ बदसुलीकी, अभद्रता और कपड़े फाड़ने का गुनाह किया।
नारी के सम्मान भाजपा मैदान में!
2014 में जब भाजपा और एनडीए की सरकार बनी थी तब यह नारा दिया गया था कि नारी के सम्मान भाजपा मैदान में। इस नारे से देश की महिलाओं को लगा कि अब उनके प्रति होने वाली हिंसा और अपराधों में कमी आ जायेगी। महिलाओं की समस्याओं के निदान होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन 12 साल बीत गये मोदी सरकार को महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और अत्याचार को कम करने का मौका नहीं मिला है। अफसोस की बात तो यह है कि जब भी किसी महिला के साथ यौन शोषण और हिंसा का मामला सामने आता है तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस उसे न्याय दिलाने में दिलचस्प नहीं लेता है। अफसोस की बात है कि भ्रष्टाचारी और आपराधिक प्रवृत्ति वालों के तार भाजपा शीर्ष नेताओं से जुड़े दिखते है।

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