सरकार और पुलिस का अहंकार तो ​देखिये पीड़िता को ही गिरफ्तार कर लियादेश के अंदर हालात काफी बेकाबू होते जा रहे हैं। अगर सवाल सत्ता से करेंगे तो पुलिस आपको मारपीट कर अपमानित कर जेल में डालने को बेकरार है। सत्ता की शह पर पुलिस निरंकुशता की सभी सीमाएं लांघ रही है। जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को पुलिस की घिनौनी हरकतों का सामना करना पड़ रहा है। आईपीएस रैंक के अफसर बेहयायी पर उतर गये हैं। बेशर्मी से महिलाओं के सवाल पर हैवानियत का नंगा नाच कर रहे है। जंतर मंतर पर प्रदर्शन को कवर रही एक महिला पत्रकार को पुलिसिया उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। इतना ही नहीं उस बेशर्म और जाहिल अफसर को बचाने के लिये गोदी मीडिया उतर गयी है। बल्कि उस पीड़िता महिला पत्रकार पर ही कीचड़ उछालना शुरू कर दिया गया है। 20 जुलाई को भी सीजेपी के प्रोटेस्ट के दौरान एसीपी संदीप लांबा ने एक महिला प्रदर्शनकारी को सार्वजनिक स्थल पर दिनदहाड़े थप्पड़ मार कर सनसनी फैला दी थी। लेकिन दो माह से अधिक समय बीतने के बाद भी उस पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। दिल्ली पुलिस के इंस्पैक्टर ने एक लड़की के कमर के नीचे डंडा लगाया था वो आज भी ड्यूटी पर है। इससे साफ हो रहा है कि जंतर मंतर पर जो नीचता की जा रही है उसे केन्द्र की मोदी सरकार के इशारों पर किया जा रहा है।सरकार की शह पर पुलिस बन गयी है जल्लाद
अमित शाह की पुलिस के अफसरों की इतनी हिम्मत हो गयी कि महिला पत्रकार के सवाल पूछने पर आईपीएस अफसर ने दिनदहाड़े सरेआम महिला के सीने पर मारा और दबाया और बेशर्मी से भाग गया। मामला तूल पकड़ा तो उसके बचाव में संघ और भाजपा का समर्थक टीवी चैनल खुल कर अफसर के बचाव करने जुट गया है। इतना ही नहीं उस महिला पत्रकार ने जब वाहियात और बेशर्म अफसर के खिलाफ एफआइआर करानी चाही तो रिपार्ट ही दर्ज नहीं की गयी। इस आपराधिक वारदात के दो दिनों बाद उस महिला पत्रकार को ही किसी मामले में गिरफ्तार कर थाने में बैठाया गया है। इसे कहते हैं जबरा मारे और रोने भी नहीं दे। वहीं दूसरी ओर चिपक्ष इस मामले में आरोपी पुलिस अफसर की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है।पुलिस का घिनौना चेहरा सामने आया चहुंओर निंदा और आलोचना
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिये बर्बरतापूर्ण कीलयुक्त लाठीचार्ज, पैलेटगन और अमानवीय व्यवहार किया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं और युवतियों के साथ अमानवीय बर्बरता की गयी। उनको सड़क पर घसीट कर लाठियों से बुरी तरह पीटा गया। इतना ही नही पुलिस अधिकारियों ने लडकियों के कपड़े तक फाड़े। इस मामले में एक आईपीएस अधिकारी संदीप लांबा पर गंभीर आरोप लगाये गये। एक इंसपैक्टर पर महिला के साथ अभद्र व्यवहार का आरोप लेकिन दो माह बाद भी सरकार ने इन आरोपी अफसरों और सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी। इस मामले को जब सुप्रीमकोर्ट में उठाया गया तो वहां भी निराशा हाथ लगी। सुप्रीमकोर्ट ने मामले के लिये एक जांच कमेटी गठित कर इतिश्री कर ली। इस बात को लेकर सीजेपी और इंडिया ब्लाक ने सरकार को संसद के मानसून सत्र में मोदी शाह को जमकर खरीखोटी सुनायी।
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