सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लताड़ादिल्ली पुलिस ने मनमानी की सभी हदें तोड़ींप्रदर्शन कवर रहे पत्रकारों पर पुलिस का अत्याचारदिल्ली के जंतर मंतर पर पिछले दो अक्टूबर से सामाजिक संस्थाओं, वकीलों, विपक्षी दलों के कार्यकर्ता और सीजेपी के समर्थक सीईसी ज्ञानेश कुमार की मनमानी और एसआईआर के घोटालों को लेकर मोर्चे निकालते हुए प्रदर्शन किये जा रहे हैं। प्रदर्शन कवर कर रहे पत्रकारों को दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने न केवल बदसुलूकी बल्कि डिटेन सार्वजनिकतौर पर बेइज्जत किया। उनके साथ मारपीट कर सार्वजनिक सरकार के आदेश पर दिल्ली में पुलिस के अलावा आईटीबीपी, आरएएफ और बीएसएफ के जवानों को प्रदर्शन रोकने के लिय तैनात कर दिया गया। इन जवानों की मदद से दिल्लीवासियों को कैद में रहने पर मजबूर कर दिया। लगभग 60 हजार सुरक्षा बलों के जवाानों के दिल्ली पर कब्जा कर लिया। जो भी सड़क पर दिखा इन लोगों जबरन बसों में ठूंस कर डिटेंशन सेंटर्स पर घंटों बंद रखा। दिल्ली पुलिस की बेहायायी पर सुप्रीमकोर्ट भी खासा नाराज है। 9 अक्टूबर को सुप्रीमकोर्ट ने यह आदेश दिये थे कि आम जनात को परेशानी न इस बात का ध्यान रखा। आवागमन में उसे किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। लेकिन गृहमंत्री की शह पर दिल्ली को पुलिस और सुरक्षा बलों से पाट दिया् गया।मोदी शाह पुलिस और सुरक्षा बलों के सहारे देश चला रहेइंडिया ब्लाक और राहुल कहां मोदी शाह को यह कह कर निशाने पर ले रहे हैं कि मोदी शाह रोज संविधान की हत्या कर रहे हैं। सत्ता के लिये संविधान की आत्मा पर हमला कर रहे है। सत्ता के नशे में सरकार संविधान के साथ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे है। न जाने क्यों सरकार देश के साथ गद्दारी करने वाले सीईसी ज्ञानेश कुमार के बचाव में उतरी हुई सवाल ज्ञानेश कुमार से पूछा जा रहा है तो बीजेपी को उतार दिया जाता है। इससे साफ है कि ज्ञानेश कुमार अपनी ताकत का इस्तेमाल सरकार और भाजपा को लाभ पहुंचा रहे हैं। जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं उनके नेतृत्व भाजपा और एनडीए के घटक दल लगातार जीत हासिल कर रहे है। अमित शाह इतने विश्वास से यह एलान कर रहे हैं पचास साल तक केन्द्र में मोदी की सरकार बनती रहेगी। प्रदर्शन करना तो संवैधानिक अधिकार है कोई भी सामाजिक संगठन अपनी आवाज जंतर मंतर पर उठा सकता है। सरकार के हिसाब से भी जंतर मंतर पर प्रतिक्रिया दे के लिये आजाद है। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने वालों में कांग्रेस इंडिया ब्लाक आम आदमी पार्टी के अलावा सीजेपी लगातार उठा रहे है। समूचा विपक्षा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का मांग कर रहा है। इससे मोदी सरकार की हवाइयां उड़ीं हूई है।किसके आदेश पर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा जवानों ने प्रदर्शन पर रोक लगायी10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर सीजेपी ने एसआईआर में धांधलियां करने के लिये ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा होने तक प्रोटेस्ट की कॉल की थी। सरकार किसी भी सूरत में प्रदर्शन को रोकने लिये दिल्ली पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षा बलों को दिल्ली तैनात कर दिया। इस मामले को लेकर भारत सरकार की विदेशों में जमकर थू थू हो रही है। लेकिन सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई टिप्पणी नहीं दी है। इस माह की शुरूआत से ही जंतर मंतर पर धरने प्रदर्शन शुरू हो गये और अभी भी सीजेपी ने एलान कर दिया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा होने तक देशव्यापी प्रदर्शन जारी रहेंगे। देश विदेश में सीजेपी और इंडिया ब्लाक के प्रदर्शन की गूंज विदेशों में भी सुनायी दे रही है। सुप्रीमकोर्ट ने अफसरों से पूछा कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर पुलिस और सुरक्षा जवानों ने जंतर मंतर पर तय प्रोटेस्ट को रोका गया। इस बात का जवाब दो दिन के भीतर कोर्ट में पेश करे। दरअसल मीडिया और सोशल में चर्चा हो रही थी दिल्ली में ऐसा माहौल बन गया और सुप्रीम कोर्ट शांत बैठा। इस बात से सुप्रीमकार्ट ने अपनी छवि बचाने के लिये एससी ने सरकार और पुलिस अफसरों के कान खीचने की कार्यवाही की है। जंतर मंतर पर अज्ञात गुंडों और दिल्ली पुलिस की जुगलबंदीपिछले तीन दिनों से जंतर मंतर प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच जमकर मुठभेड़ दिख रही थी। दिल्ली पुलिस और हजारों जवानों ने प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पहुंचने देने के लिये बर्बरता और दमनकारी व्यवहार किया। बूढ़े बच्चों और जवान महिला और जवानों पुलिस और सुरक्षा जवानों की बद्तमीजी और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि पुलिस का रवैया दोहरा देखा गया। जिस जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को आने से रोकने के लिये सड़कों पर भारी बैरिकैडिग और सड़कों पर कीलें ठोकी थी वहीं सरकार समर्थक अराजक तत्व वहां पहु्ंच कर प्रदर्शकारी युवक युवतियों को हिंसा का शिकार बनाते रहे वो भी दिल्ली पुलिस के जवानों के सामने। इस हिंसा को रोकने के बजाय पुलिस के जवान मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे थे। देश गृहयुद्ध के हालात से गुजर रहा देश की राजधानी पुलिस स्टेट बना दी गयी है। समाज का हर वर्ग केन्द्र से बिगड़ती सामाजिक और अर्थव्यवस्था सवार पूछ रही सरकार है कि बस उसे अपनी सत्ता बचाने की लगी है। पूरा देश हिन्दू मुस्लिम मंदिर मस्जिद में उझाया जा रहा है। हर तरफ भय का माहौल है। देश को सांप्रदायिकता की आग में झोंका जा रहा है । हैरानी की बात है सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी बहुत कुछ इशारा कर रही है।
—बार देखा गया
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