दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक में ऊपर से बिखरे बिजली, गैस और संचार के तारों को भूमिगत करने का पायलट प्रोजेक्ट इस बार जून‑जुलाई में पूरा होने की उम्मीद के बावजूद शुरू नहीं हो पाया। सरकार के बीच चल रहे सर्वे और विभागीय संवाद में यह सामने आया कि इलाके में पहले अनुमान से कहीं अधिक घनी तरह से कई तरह की यूटिलिटी लाइनें बिछी हुई हैं, इसलिए प्रारंभिक योजना पर फिर से विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, पायलट के रूप में चुनी गई दो सड़कों — मोर सराय रोड और एस्पलेनेड रोड — पर काम रोकित है और योजना को लागू करने से पहले समन्वय तंत्र मजबूत करने की आवश्यकता बताई जा रही है। बिजली राज्यमंत्री अशिष सूद से जुड़ी जानकारी में कहा गया है कि पावर विभाग कुछ दिनों में एक उच्च‑स्तरीय कमेटी गठित करेगा, जो कार्य का समय‑सारिणी बनाएगी और विभिन्न विभागों के कामों के तालमेल को तय करेगी।
सरकारी स्रोतों ने बताया है कि प्रस्तावित कमेटी का नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (पावर) करेंगे और इसमें MCD, PWD, दिल्ली जल बोर्ड, पावर यूटिलिटीज, IGL, डिस्कॉम्स तथा दूरसंचार और अन्य भूमिगत नेटवर्क रखे जाने वाले विभाग शामिल होंगे। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक विभाग के नीचे खुदाई के कारण बाद में किसी अन्य विभाग का काम प्रभावित न हो और व्यापार तथा ट्रैफिक पर अनावश्यक प्रतिकूल असर कम से कम हो।
पहले के लागत‑अनुमान के मुताबिक पायलट के लिए लगभग 8 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि विस्तृत सर्वे के बाद योजना में बदलाव और नई विधियों की जरूरत के चलते लागत बढ़ने की संभावना है। संकरी गलियों के चलते पारंपरिक खोदकर बिछाने के बजाय कई खंडों में ट्रेंचलेस तकनीक अपनाने पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख है कि पहले से इस क्षेत्र में काम कर चुकी एक एजेंसी से सर्वे कराया गया है और वह अब वेंडरों के समन्वय का कार्य कर रही है; काम के आदेश कुछ ही दिनों में जारी होने की संभावना बताई जा रही है।
अधिकारियों ने यह भी कहा है कि केवल ऊपर के तार हटाकर उन्हें जमीन में रखने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा; भविष्य में मरम्मत और नई लाइनबिछाई के लिए यूटिलिटी डक्ट बनाना आवश्यक माना जा रहा है।

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