मोदी शाह के बुरे दिन शुरू,सत्ता बचायें कि टीएमसी के सांसदों की फटी सिलें
यह कहना गलत नहीं होगा कि देश में जो राजनीतिक हालात दिख रहे हैं उसमें मोदी शाह सबसे ज्यादा परेशान दिख रहे हैं। 12 सालों में भाजपा और मोदी सरकार के इतने बुरे दिन कभी नहीं रहे हैं। हालात ये हैं कि विष गुरू और भाजपा के चाणक्य विपक्ष का सामना करने से इतना घबरा रहे हैं कि संसद के दोनों सदनों में जाने से डर रहे हैं। मानसून सत्र में एक बार फिर इंडिया ब्लाक एनडीए सरकार पर भारी पडता दिख रहा है। इस सत्र में मोदी सरकार कई महत्वपूर्ण बिल पेश करना चाह रही थी। लेकिन विपक्ष ने सरकार की जबरदस्त घेराबंदी कर सरकार के छक्के छुड़ा दिये हैं। इस सत्र में सरकार परिसीमन संशोधन बिल और एफसीआरए बिल सदन के पटल पर रखना चाह रही थी। लेकिन पीएम मोदी और अमित शाह पूरी सत्र बीत गया लेकिन विश्व गुरु और चाणक्य सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा के बुरे दिन शुरू हो गये हैं। अपनी सरकार बचायें कि दूसरों की फटी में टांग अड़ायें।
मोदी शाह की साजिश में फंसे टीएमसी बागी सांसद
मई में प बंगाल के चुनाव परिणाम आने के बाद से टीएमसी पार्टी के बुरे दिन शुरू हो गये। परिणाम आये और ममता बनर्जी के लिये परेशानियों का झमेला शुरू हो गया। पहले 28 सांसदों में 20 ने काकोली घोष के नेतृत्व में बागी हो गये और अनजान पार्टी एनसीपीआई में शामिल हो गये। इनमे ममता बनर्जी के सबसे करीबी सांसद यूसुफ पठान समेत दो तीन और सांसद भी टीएमसी से छिटक गये। टीएमसी से सांसद सायोनी घोष के जाने पर सबने हैरत जतायी जो ममता दीदी की सबसे करीबी मानी जाती थीं। विधानसभा चुनाव के परिणाम आते ही 80 विधायकों मे 65 एमएलए पार्टी से बगावत कर अलग हो गये। बाकी विधायक फिलहाल ममता दीदी के साथ हैं लेकिन कब तक यह नहीं कहा जा सकता है। बागी विधायक अपने को असली टीएमसी बता कर चुनाव आयोग पहुंच और टीएमसी के चुनाव चिह्न औश्र झण्डे पर अपना हक जता रहे हैं। वहीं दूसरी ममता पूरी ताकत से अपनी पार्टी को बचाने मे जुटी हुई हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या तो उन लोकसभा सांसदों के लिये खड़ी दिख रही है जो ममता का साथ छोड़ एनडीए में शामिल हुए हैं। संसद का मानसून सत्र पूरा बीत गया लेकिन इन बीस सासंदों के भविष्य पर कोई फैसला लोकसभा अध्यक्ष बिडला ने नहीं लिया है। ऐसे में 20 सांसदों के भविष्य पर तलवार लटक रही है। जब से ये सांसदों ने पार्टी छोड़ एनडीए में शमिल हुए है तब से इन्हें केन्द्र के बड़े दिग्गज मंत्रियों ने साथ खड़े होने का वादा कर रखा है लेकिन लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला ने इन सांसदों के बारे में कोई निर्णय नहीं किया है।

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