राहुल गांधी ने चर्चा प्रस्ताव को नकार दिया

संसद के आखिर में गृहमंत्री अमित शाह संसद के सदन मेंं पहुंचे और उन्होंने विपक्ष को चैलेंज दिया कि वो किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिये तैयार हैं। सोची समझी रणनीति के तहत शाह लोकसभा में पहुंचे और नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष को पेपर लीक, प्रदर्शनकारियों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज, शिक्षा मंत्रालय में व्याप्त कुप्रबधन, एथेनाल ब्लैंडिंग को लेकर चर्चा करने को तैयार है। जिस पर नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी व इंडिया ब्लाक ने उनके इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। राहुल गांधी ने कहा हमें अमित शाह का प्रवचन नहीं सुनना है। हमें हमारे तीन मुद्दों पर सरकार से जवाब चाहिये। सरकार ने रणनीति के तहत सत्र के अंतिम दौर में गृहमंत्री को सदन में भेज कर सिद्ध कर दिया कि उनकी मंशा विपक्ष उठाये मुद्दों पर जवाबदेही में कोई दिलचस्पी नहीं थी। राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि हम अभी सरकार पीएम मोदी और शाह को अपने मुद्दों पर तब तक घेरते रहेंगे जब तक शाह का इस्तीफा नहीं होगा।

देश के गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा देने वाले हैं!

संसद का मानूसन सत्र बीत गया लेकिन सदन में न तो पीएम मोदी और न ही गृहमंत्री अमित शाह गये। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार की नजरों में न तो सदन की इज्जत है न ही देश के संविधान की। मोदी सरकार को विपक्ष ने कई मुद्दों पर बुरी तरह घेर रखा है। फिलहाल विपक्ष सरकार से तीन मुद्दों पर सफाई मांग रहा है। लेकिन सरकार ने इस मामले में सही ढंग से तवज्जो दी है। हालात यह हैं कि खुद को विश्व गुरु कहलाने वाले नरेंद्र मोदी विपक्ष के सवालों का जवाब देने की हिम्मत जुटा रहे हैं और न ही चाणक्य अमित शाह विपक्ष के आरोपों का उत्तर देने में इच्छुक हैं। सत्र के अंतिम दिन अचानक खास मीडिया के कैमरे पर प्रगट हुए और कहा कि वो सदन में विपक्ष के सारे आरोपों पर चर्चा करने को तैयार हैं लेकिन विपक्ष सत्र चलाने में गतिरोध डाल रहा है। भगोड़े शब्द के इस्तेमाल करने पर शाह ने कहा कि वो कहीं नहीं गये हैं। रोज संसद परिसर में अपने कार्यालय के चैंबर में आ रहे हैं। सदन में गतिरोध होने की वजह से वो सदन में नहीं जा रहे है।

राहुल गांधी ने कहा अमित शाह को इस्तीफा देना ही होगा

वहीं समूचा विपक्ष कह रहा है कि हमें चर्चा नहीं चाहिये सरकार के गृहमंत्री अमित सदन में इस बात पर जवाब दें कि संसद मार्ग मार्च में पैलेट गन चलाने, कील लगी ला​ठियों से युवाओं को और प्रदर्शकारियों और महिलाओं के साथ बर्बरतापूर्वक आतंकवादियों जैसा बर्ताव किसके आदेश पर हुआ। हमें अमित शाह के प्रवचन को नहीं सुनना है। अगर अमित शाह ये कहते हैं कि उनके आदेश पर युवा प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता की गयी तो उसके लिये उन्हें इस्तीफा देना चाहिये। अगर वो कहते हैं कि उन्होंने लाठीचार्ज का आदेश नहीं दिया तो उसके लिये कौर जिम्मेदार ​है। तो उन्हें इस बात पर इस्तीफा देना होगा कि अपने विभाग को सही ढंग से चलाने अक्षम रहे है। दूसरी बात यह कि अयोध्या के राम मंदिर में हजारों करोड रुपयों के चढ़ावा चोरी में प्रबंधन और ट्रस्ट के लोगों को बचाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। पीएम मोदी ने लोकसभा में सदन के अंदर यह जानकारी दी थी कि राम मंदिर निर्माण के लिये एक ट्रस्ट बनाया जायेगा। उस ट्रस्ट में संघ और बीजेपी के खास लोग शामिल किये गये। लेकिन डकैती का मामला सामने आया तो यूपी सरकार ने एसआईटी गठि​त कर मामले को रफा दफा कर दिया। सभी बड़े चोरों और प्रभावी लोगों को क्लीन चिट देते हुए राहत दे दी। इस मामले में भी राहुल गांधी ने यह कहा कि केन्द्र और यूपी सरकार ने मिलकर राममंदिर लूट मामले में खास लोगों को बचाने में अहम् रोल निभाया है। इस पर भी सरकार और मोदी शाह जवाब दें। इसके अलावा सरकार ने जो नीट पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर जो संशोधन बिल पास किया है उसमे पेपर लीक होने की व्यवस्थ्ज्ञा का जिक्र नहीं किया है। सिर्फ दोषियों की सजा बढ़ाने की बात कही है। विपक्ष का कहना है कि 2024 में इसी पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर एक कानून बनाया गया था उसके बावजूद लगातार देश में एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षा पेपर लीक हुए उन पर कोई रोक नहीं लग पायी। मोदी सरकार का शिक्षा पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मंशा नहीं दिख रही है।

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