दिल्ली हाईकोर्ट ने अर्जीकारियों—पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य AAP नेताओं—को उस आपराधिक अवमानना (criminal contempt) मामले में चार सप्ताह के अंदर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है जिसमें न्यायमूर्ति स्वरणा कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रकाशित कथित 'विलिफाइंग' पोस्टों को मुद्दा बनाया गया है।

आवेदन के आधार पर जज शर्मा ने मई के मध्य में यह आपराधिक अवमानना कार्रवाई शुरू की थी और बाद में संबंधित राजनेताओं को नोटिस भी जारी किए गए थे। सत्र के दौरान अधिवक्ता पक्ष ने बताया कि उन्हें वह सामग्री अभी तक उपलब्ध नहीं करवाई गई जो अदालत ने शिकायत का आधार बताई है।

बेंच—जिसमें न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींदर दूदेजा शामिल थे—ने इस दावे को सुना और कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह प्रतिवादियों को वह सामग्री प्रदान करे ताकि वे नियत समय में जवाब दाखिल कर सकें। अदालत ने कहा कि जब तक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती, तर्क देने का सही ढंग संभव नहीं होगा, इसलिए समयसीमा और प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।

एक जुड़ी याचिका में AAP के गोपाल राय और पत्रकार सौरेव दास को भी चार सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा गया है; उस याचिका में आरोप है कि उनके भाग रहने से न्यायमूर्ति स्वरणा शर्मा के खिलाफ एक योजनाबद्ध सोशल मीडिया अभियान चला।

यह मामला आगे की सुनवाई के लिए 21 सितंबर, 2026 को सूचीबद्ध किया गया है। हाईकोर्ट ने पहले भी मई में इस मामले में नोटिस जारी किए थे और पक्षों को जवाब देने का अवसर दिया गया था। अब रजिस्ट्री द्वारा सामग्री उपलब्ध कराने और प्रतिवादियों के जवाब आने के बाद कोर्ट आगे की दलीलों पर निर्णय लेगी।

संदर्भ स्रोतThe Hindu DelhiTimes of India Delhi
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