ईरान और ओमान ने स्ट्रेट ऑफ हौर्मुज के लिए एक नए शिपिंग मार्ग के भौगोलिक निर्देशांक पर आपसी समझ बना ली है और दोनों पक्ष एक संयुक्त घोषणा के अंतिम मसौदे पर काम कर रहे हैं। यह जानकारी तेहरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के आभासी बयानों और संवादों से सार्वजनिक हुई।

तेहरान ने स्पष्ट किया है कि समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिए जाने के बावजूद यह गारंटी नहीं देता कि जलडाल पर सुरक्षा स्वतः बहाल हो जाएगी; ईरान ने कहा है कि क्षेत्रीय नौसैनिक गतिविधियों, विशेषकर अमेरिकी बंदरगाह नाकाबंदी और सैन्य उपस्थिति, अभी भी जोखिम कारक बने हुए हैं।

पृष्ठभूमि में यह संकट उस समय तेज हुआ जब फरवरी में अमेरिकी और इजरायली हवाई एवं नौसैनिक हमलों के बाद मार्ग पर यातायात भारी रूप से बाधित हो गया। तब से हौर्मुज में तेल और एलएनजी से जुड़ा पारगमन घटा हुआ है; यह जलमार्ग पूर्व में वैश्विक तेल व गैस का लगभग पाँचवाँ हिस्सा संभालता था।

मीडिया रिपोर्टों और कूटनीतिक बयानों के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था में पारगमन लेन विभाजन का एक मॉडल चल रहा है: गमन (इनबाउंड) के लिए एक पथ जो ईरानी जलक्षेत्र के निकट होगा और प्रस्थान (आउटबाउंड) के लिए एक अलग मार्ग जो ओमान के समीप रखा गया होगा। इसी रूपरेखा पर नियंत्रण और शुल्क का विवाद मुख्य अड़चन बना हुआ है। तेहरान के कुछ सूत्रों ने सेवा-शुल्क की बात उठाई है; ओमान ने कम प्रतिशत की व्यवस्था पर विचार किया है जबकि अमेरिका स्वतंत्र नौवहन और शुल्क-रहित पारगमन पर जोर दे रहा है।

ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और वॉशिंगटन को वार्ताओं से अवगत रखा गया है, परन्तु अमेरिका कूटनीतिक रूप से सीधी भागीदारी से अलग रहा।

समझौते के टिकने और मार्ग के नियमित खुलने के लिए कई तकनीकी, सुरक्षा व राजनीतिक शर्तें अभी शेष हैं। रूट का कार्यान्वयन समुद्री मनोबल, तटीय नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा; तेल-आयात और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए परिणाम तत्काल और व्यापक हो सकते हैं।

संदर्भ स्रोतBBC WorldIndian Express WorldThe Hindu WorldNDTV World
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