तरुण तेजपाल ने बृहस्पतिवार को सर्वोच्च न्यायालय में बॉम्बे हाई कोर्ट के 6 अगस्त के आदेश के खिलाफ अपील दायर की जिसमें उन्हें 2013 के एक यौन अपराध मामले में दोषी करार देकर 10 साल के कठोर कारावास व जुर्माना की सजा सुनाई गई थी। अपील उनके वकील आदित्य समददार के माध्यम से दायर की गई।
यह मामला एक वरिष्ठ पत्रकार पर 7-8 नवंबर 2013 की घटनाओं से जुड़ा है, जब उन पर गोवा के एक पांच-सितारा होटल के लिफ्ट में एक जूनियर महिला पत्रकार के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था; बाद में उन्हें जमानत मिली और मुकदमा 2017 में शुरू हुआ।
2017 में अभियोजन ने विभिन्न आईपीसी धाराओं के तहत आरोप तय किए; 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट ने अभियोजन के सबूतों की अपर्याप्तता बताते हुए तेजपाल को बरी कर दिया। गोवा सरकार ने उस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की, और हाई कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को ट्रायल कोर्ट की बरी करने वाली टिप्पणियों को पलटते हुए दोषसिद्धि की और 10 साल की सजा सुनाई।
उसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सजा बढ़ाने की याचिका दाखिल की, यह तर्क देते हुए कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्राप्त सजा अपर्याप्त है और आजीवन कारावास की माँग की गई। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अब तेजपाल की आपील और गोवा सरकार की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट निर्णय देगा।

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