बुधवार-गुरुवार के ट्रेडिंग सत्र में भारतीय शेयर बाज़ार में तेज बहार दिखाई दी। बीएसई का 30-शेयर सेंसैक्स दिन के अंत में 628.04 अंक या 0.82% ऊँचा बंद हुआ और 77,537.72 पर पहुंचा, जबकि एनएसई का निफ्टी 24,231.85 पर 153.55 अंक (0.64%) ऊपर बंद कर सात-दिनों की गिरावट की श्रृंखला को तोड़ दिया।
विकास का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बोंड यील्ड्स में राहत और उससे उत्पन्न बेहतर जोखिम भावना रही, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी के आकर्षण को बल मिला। देरी से उपलब्ध डेटा में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भी बाजार में खरीदारी दिखाई। क्षेत्रवार, आईटी और वित्तीय समूहों में मजबूती रही; रियल्टी सूचक भी सत्र में बढ़त देने वाले सेक्टर्स में था, जबकि PSU बैंक लगातार छठे सत्र के लिए दबाव में दिखा।
एशियाई बाजारों में भी कोरियाई कोस्पी, जापानी निक्की और चीनी व हांगकांग के सूचकांकों में उछाल दर्ज किया गया, और अमेरिकी बाजारों की सकारात्मकता ने भी घरेलू रुझान को समर्थन दिया। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें उच्च बनी रहीं, जो मुद्रास्फीति और निगमों की मार्जिन पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क उत्साह का रहा—रिकवरी व्यापक थी परन्तु ऊष्मांक (crude) और वैश्विक भू-राजनैतिक खतरों ने बाजार के आगे के रुझान पर अनिश्चितता बरकरार रखी।

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