सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने 13 अगस्त 2026 को हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में SENSEX के इन्डिकेटिव एग्जीक्यूटिव प्राइस (IEP) में तीन अलग-अलग समयों पर तेज उछाल पाए जाने पर दो संस्थाओं के खिलाफ अस्थायी आदेश जारी किया। निरीक्षण में पाया गया कि उस दिन सप्ताहिक वैल्यूएशन/डेरिवेटिव एक्सपायरी होने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा था।

निगरानी से यह उजागर हुआ कि Copthall Mauritius के द्वारा उस सत्र में किए गए आक्रामक खरीद ऑर्डर कुल खरीद मूल्य के लगभग 85-99% तक जिम्मेदार थे; कई बड़े ऑर्डर ऊपरी सीमा के आसपास (लगभग +3% रिकॉर्डेड रेफरेंस प्राइस) पर दिए गए और बाद में रद्द कर दिए गए, जिससे IEP ऊपर गया और Copthall को लाभ हुआ। दूसरी ओर, Mansi Share & Stock Broking ने कुछ SENSEX शेयरों पर बड़े सेल ऑर्डर रखे जो लगभग 1.5–3% नीचे थे और वे ऑर्डर 3–5 सेकंड के भीतर रद्द किए गए; इससे IEP नीचे धकेला गया और इससे जुड़े डेरिवेटिव पोजीशन पर संभावित लाभ बनता दिखा।

SEBI ने preliminary जांच में Copthall के कथित अनुचित लाभ को लगभग ₹2.96 करोड़ और Mansi के लिए ₹71.64 लाख आंका। नियामक ने दोनों संस्थाओं के पास मौजूद प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग से संबंधित रकम सीज कर दी और CAS में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष हिस्सेदारी पर प्रतिबंध लगाया। दोनों पक्षों को 21 दिनों में जवाब देने के लिए कहा गया है और संपत्तियों का विवरण जमा करने तथा खुले पोजीशनों को तीन महीने में बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह कार्रवाई SEBI के नए CAS मैकेनिज्म में संभावित मैनिपुलेशन के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाती है।

संदर्भ स्रोतIndian Express LatestThe Hindu Business
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