गुजरात के जमनगर स्थित वाइल्डलाइफ रेस्क्यू व कंजर्वेशन केंद्र Vantara ने भारत के CITES प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष एक श्रृंखला स्वैच्छिक प्रतिबद्धतियाँ दाखिल कीं, जिन्हें संस्था ने सर्वोच्च न्यायालय में भी प्रस्तुत किया है। प्रतिबद्धताओं में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विनियमित करने वाले CITES नियमों का पालन करने का दोबारा आश्वासन शामिल है।

Vantara ने कहा है कि वह अपनी गतिविधियों में इन-सिटु संरक्षण पर अधिक जोर देगी, अर्थात् वन्यजीवों की रक्षा उनके प्राकृतिक आवासों में करने पर प्राथमिकता देगी और भारत के भीतर संरक्षण प्रयास बढ़ाएगी। संगठन ने राज्य वन्यजीव एजेंसियों के साथ मिलकर रेस्क्यू, रिहैबिलिटेशन और संरक्षण कार्यों का समर्थन करने का इरादा भी जताया।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए Vantara ने हर छह महीने में प्रगति रिपोर्ट CITES प्रबंधन प्राधिकरण को भेजने, प्राधिकरण को निरीक्षण के लिए आमंत्रित करने और व्यापक संरक्षण समुदाय के साथ जुड़ाव बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।

सबसे महत्वपूर्ण कदमों में संस्था ने मौजूदा लंबित आयात आवेदनों को वापस लेने और फिलहाल कोई नया आयात आवेदन न करने का निर्णय शामिल किया है; भविष्य में आयात के प्रस्ताव केवल CITES प्रबंधन प्राधिकरण से परामर्श के बाद ही किए जाएंगे। साथ ही उसने कहा है कि आगे केवल पंजीकृत चिड़ियाघरों से ही जानवर आयात किए जाएंगे और भविष्य में महान वानरों (great apes), बड़े बिल्लियों (big cats) तथा संकटग्रस्त प्रजातियों के आयात पर रोक रहेगी।

Vantara ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थानीय संरक्षण प्रयासों के समर्थन हेतु रेस्क्यू सेंटर्स व वेटरिनरी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और एक समर्पित अंतरराष्ट्रीय कोष बनाने की भी योजना घोषित की है।

संदर्भ स्रोतMint NewsIndian Express India
पाठकों की राय

टिप्पणियां 0

सभ्य और विषय से जुड़ी भाषा का प्रयोग करें।