सूत्रों और बाजार रिपोर्टों के अनुसार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने संभावित प्रारूप के तौर पर यह विकल्प वैश्विक निवेशकों के समक्ष अपनी IPO रोडशो के दौरान रखा कि उसके शेयर प्रतिद्वंद्वी BSE पर औपचारिक रूप से सूचीबद्ध होने के बाद भी NSE के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ‘permitted‑to‑trade’ श्रेणी में कारोबार कर सकते हैं। यह व्यवस्था कंपनी को दोनों एक्सचेंजों पर तरलता तक पहुँच देने के साथ ही NSE के संशोधित इंडेक्स नियमों के अनुरूप होने पर सूचकांकों में शामिल होने का मार्ग खोल सकती है।
वर्तमान नियमों में किसी स्टॉक एक्सचेंज का स्वयं‑सूचीकरण स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है; इसलिए NSE को ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्तावना पर बातचीत जारी है और अंतिम निर्णय नियामकीय स्वीकृति तथा अंदरूनी स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
NSE की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘permitted‑to‑trade’ ढाँचे में यह बताया गया है कि इन प्रतिभूतियों की अनुपालन व प्रकटीकरण जिम्मेदारियाँ बनी रहती हैं; उसी श्रेणी में लगभग 250 कम्पनियाँ पहले से ट्रेड कर रही हैं। बाजार पर भी खबर का असर दिखा—रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद BSE के शेयरों में दिन भर के ऊँचे स्तर से कमी दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार NSE अपने ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के लिए SEBI की मंजूरी अगस्त के अंत तक मिलने की अपेक्षा रखता है और IPO को सितंबर के दूसरे हिस्से में लॉन्च करने का लक्ष्य है।

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