पीएम को बचाने के लिये धर्मेंंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ है सब लोग इस बात से हैरान हैं कि मोदी सरकार ने अपने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सीजेपी की मांग पर कैसे हटा दिया है। जिस काम को पिछले 12 सालोंं से पूरा विपक्ष पूरा जोर लगा कर नहीं कर पाया वो ढायी माह की नवजात पार्टी सीजेपी ने कर दिखाया। बात हैरानी वाली है भी इंडिया ब्लाक पिछले दो सालों से केन्द्र सरकार मंत्रियों की नाकामी और भ्रष्टाचार को लेकर इस्तीफे मांग रही है लेकिन हरदीप पुरी, एस जयशंकर, अश्विनी वैष्णव, नितिन गडकरी और निर्मला सीतारमण के इस्तीफे नहीं हुए। लेकिन सीजेपी के आंदोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ गया। सीजेपी की मांगें सरकार ने क्यों मानी आखिर क्या वजह रही कि मोदी शाह की साजिशें सीजेपी पर कारगर नहीं हुईं। राजनीतिक पंडित कह रहे हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अब आंदोलकारी युवा केन्द्र सरकार के मुखिया पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग करने लगे हैं। यह बात पीएम मोदी के लिये सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। यही वजह है कि सरकार ने प्रधान को बलि का बनाना उचित समझा। यह बात जग जाहिर है कि की भाजपा में नरेंद्र मोदी ही एक ऐसे चमत्कारी नेता हैं जो देश में होने वाले चुनावों को जितवा रहे हैं। अगर मोदी की छवि बिगड़ी तो भाजपा की दुर्गति तय है। लेकिन ये भी सभी जानते हैं कि देश की सभी संवैधानिक संस्थाएं और प्रमुख मीडिया संस्थान सरकार के साथ कदम ताल कर रहे हैं। देश में जनता अभी भी यह मानती है कि टीवी औश्र समाचार पत्रों में जो दिखाया जाता है वही सच है उसे एजेंडा और प्रोपेगंडा में अंतर समझ में नहीं आता है। मोदी सरकार को आगामी चुनावों की चिंतायी आने वाले साल 2027 में यूपी समेत आधा दर्जन राज्यों में चुनाव होने हैं। जनता में खास तौर से युवाओं में पीएम मोदी और सरकार के खिलाफ जमकर गुस्सा दिख रहा है सीजेपी ने इन्हीं युवाओं को अपने साथ कर लिया और देश की राजनीति में उफान ला दिया है। विपक्ष भी ऐसे ही मौके की तलाश में है जिससे मोदी सरकार के लिये समस्या खड़ी हो और युवाओं के साथ खड़े हो कर मोदी सरकार की जड़ों में मट्ठा डाला जा सके। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी युवाओं की समस्याओं और मुद्दों को छात्रों की गूंज कार्यक्रम के जरिये देशव्यापी अभियान चला रहे हैं। उनके इस कार्यक्रम में युवाओं की भीड़ नजर आ रही है। इससे कांग्रेस और इंडिया ब्लाक को काफी उम्मीदें लग रही हैं। पिछले आम चुनाव 2024 में यूपी से काफी बड़ा झटका लगा। उसे उम्मीद थी कि उसकी सीटें बढ़ेंगी लेकिन 43 सीटें भाजपा हार गयी। सपा को 37 सीट और कांग्रेस को 6 सीटों पर जीत हासिल हुई। यूपी में भाजपा के लिये कई समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं।

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