बिहार की राजनीति में हड़कंप: पीके के हमलों से सबसे ज्यादा कौन डर रहाबांकीपुर उप चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को हरा कर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने हरा दिया। अब सब जगह चर्चा चल रही है कि विधायक बनने के बाद विधानसभा में पीके के निशाने पर कौन रहेगा। पीके बिहार की राजनीति में कितना बदलाव ला पाते हैं ये तो आने वाला समय बतायेगा। लेकिन भाजपा के नेताओं की इस बात का अहंकार टूट गया कि यहां से किसी कुत्ता बिल्ली को खड़ा कर देंगे और जीत जायेगा। ये बात सभी जानते हैं कि पिछले साल 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी लगभग दो सौ से अधिक उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा था। लेकिन एक भी उम्मीदवार को जनता ने विधायक नहीं बनाया। लेकिन जनसुराज पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव के करीब प्रेसवार्ताएं कर एनडीए के नेताओं को अपने निशाने पर उनके भ्रष्टाचार और अपराधों का खुलासा किया था। उनके निशाने पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रहे। उन्होंने सम्राट चौधरी पर हत्या, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और हेराफेरी के खुलासे किये थे। इसके अलावा एनडीए सरकार के मंत्री अशोक चौधरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान सरकार में मंत्री दिलीप जयसवाल, बीजेपी सांसद संजय जयसवाल के खिलाफ भी पीके ने प्रेसवार्ता कर उनको जनता के सामने नंगा किया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ये सभी दागी नेता चुनाव में जीत गये। इस बात से साफ हो गया कि बिहार की जनता को ऐसे ही दागी और भ्रष्टाचारी लोग सत्ता में चाहिये यही वजह है कि जनसुराज पार्टी के योग्य और ईमानदार उम्मीदवारों का हार का सामना करना पड़ा। एक बार वो सभी दागी नेता बिहार सरकार में मंत्री पद पर हैं।सीएम सम्राट चौधरी पीके के हमलों से कैसे बचें!अब सवाल यह उठ रहा है कि 2025 के चुनाव के पहले जिस पीके ने सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाये थे वो उनका जवाब नहीं दे पाये। हा यह बात और है एक बार फिर से सम्राट चौधरी चुनाव जीत कर विधायक बने और अब वो बिहार के सीएम बन गये हैं। लेकिन पीके के विधायक बनने से सबसे ज्यादा तकलीफ और परेशान सीएम चौघरी को होने वाली है क्यों कि विधानसभा के अंदर पीके सबसे ज्यादा सवाल सम्राट चौधरी से ही करने वाले हैं। पीके ने प्रेसवार्ता कर सम्राट चौधरी के बारे में खुलासा किया था कि वो सात लोगों की हत्या में सजा काट कर आये हैं। इसके अलावा उनकी शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाये थे। यह भी आरोप है कि सम्राट चौधरी ने चुनाव आयोग में फर्जी शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र जमा किये हैं। उन्होंने यह भी मांग की थी कि चुनाव आयोग उनके प्रमाणपत्रों की जांच कर उन पर तत्काल ऐक्शन ले। लेकिन चुनाव आयोग उनकी इस मांग पर कोई कार्रवाई नही की। लेकिन अब पीके ऐसी विधानसभा सीट से विधायक बने हैं जो काफी समय से भाजपा के कब्जे में थी। इसी सीट से भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन पांच बार के विधायक रहे हैं। इस सीट पर हार होने से भाजपा को भारी झटका लगा है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।
पाठकों की राय

टिप्पणियां 0

सभ्य और विषय से जुड़ी भाषा का प्रयोग करें।