दिल्ली सरकार ने राजधानी के लिए नया भूजल/बोरवेल पॉलिसी ड्राफ्ट तैयार किया है; ड्राफ्ट में सभी घरेलू और वाणिज्यिक बोरवेल्स पर जल‑मीटर (water meter) अनिवार्य करने और निकासी के आधार पर उपभोक्ता शुल्क वसूलने का प्रस्ताव रखा गया है — यह नवीनतम कवरेज 11 जुलाई 2026 को प्रमुख मीडिया आउटलेट्स (Hindustan Times, NDTV) ने प्रकाशित किया। ड्राफ्ट का मकसद और प्रमुख प्रावधान ड्राफ्ट का लक्ष्य वन‑टाइम अनुमति‑आधारित व्यवस्था को कम करके भूजल की सतत निगरानी और वास्तविक निकासी (volumetric extraction) के आधार पर चार्ज लगाने के जरिए अवैध या अतिनिकासी को नियंत्रित करना बताया गया है; इसमें रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने तथा नए बोरवेल अनुमतियों पर शर्तें लगाने के विकल्पों पर भी विचार शामिल हैं (रिपोर्टिंग: Hindustan Times/NDTV, 11 जुलाई 2026)। नीति‑प्रक्रिया की पृष्ठभूमि और आधिकारिक संकेत सरकार इस व्यापक बोरवेल नीति पर काम कम‑से‑कम दिसंबर 2025 से कर रही है — Delhi Jal Board ने 6 दिसंबर 2025 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सूचित किया था कि एक व्यापक नीति अंतिम चरण में है। इसके अलावा मार्च 2026 में मंत्रियों के बयान भी घरेलू बोरवेलों को नियमित करने और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करने के इरादे का संदर्भ देते हैं (DJB/मीडिया कवरेज, दिसंबर 2025–मार्च 2026)। ऑडिट निष्कर्ष और नीतिगत तर्क Comptroller & Auditor General (CAG) के हालिया ऑडिट में डेल्ही जल बोर्ड (DJB) के बोरवेल‑मीटर स्थापना और उनके संचालन में कमी दर्ज है; ये ऑडिट‑निष्कर्ष ड्राफ्ट में मेटरिंग का दायरा बढ़ाने के सुझाव का समर्थन करने के रूप में रिपोर्ट किए गए हैं (CAG रिपोर्ट)। ड्राफ्ट का दर्जा और सार्वजनिक नोटिफिकेशन का अभाव प्रकाशित कवरेज सीधे तौर पर इसे “ड्राफ्ट” स्थिति में बता रही है; उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड और सरकारी गज़ेट पर 11 जुलाई 2026 की रिपोर्टिंग के बाद तक इस ड्राफ्ट की कोई आधिकारिक अधिसूचना/नोटिफिकेशन नहीं मिल पाया है — अर्थात मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित नियम अभी औपचारिक रूप से लागू नहीं किए गए हैं और अंतिम नीति जारी होने तक बदलाव संभव हैं (Hindustan Times/NDTV; निजी सत्यापन‑नोट)। आगे का रुख और सत्यापन के बिंदु मौजूदा कवरेज यह दर्शाती है कि नीतिगत फाइनलाइज़ेशन जारी है, पर निर्णायक जानकारी के लिए आवश्यक है कि दिल्ली सरकार, जल मंत्री या Delhi Jal Board आधिकारिक गज़ेट/प्रेस विज्ञप्ति अथवा DJB का परामर्श‑दस्तावेज़ जारी करे। रिपोर्टों ने यह भी संकेत दिया है कि NGT में दायर फाइलिंग या आदेश नीतिगत ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं — इन दस्तावेज़ों की जाँच भी जरूरी रहेगी (मीडिया और DJB/NGT संदर्भ)।
दिल्ली सरकार का भूजल ड्राफ्ट: राजधानी में सभी घरेलू व वाणिज्यिक बोरवेल्स पर जल‑मीटर अनिवार्य, निकासी के आधार पर शुल्क का प्रस्ताव
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