नालसार छात्रों सीजेआई का मामला गहराया, बार कौंसिल अध्यक्ष का बेतुका बयान और माफी!सीजेआई को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है। आंध्र पदेश की नालसार विवि के छात्रों ने प्रशासन को चिट्ठी लिख कर यह मांग रखी कि विवि में जो ड्रिग्री वितरण समारोह का आयोजन किया जा रहा है उसमे वो मुख्य अतिथि सीजेआई सूर्यकांत का नहीं बुलाया है हम उनके हाथों से डिग्री नहीं लेना चाहते हैं। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि युवाओं में सीजेआई सूर्यकांत के कॉक्रेाच वाले बयान का कितना गहरा असंतोष है। इससे यह भी समझा जाना चाहिये कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को जो मान सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है उसकी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा को बचाये रखने में पदाधिकारी की भी जिम्मेदारी है। बार कौंसिल अध्यक्ष ने छात्रों को धमकायाअब इस मामले में बार कौंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की एन्ट्री हो गयी है। उन्होंने अपने एक बयान में नालसार से कानून की डिग्री लेने वाले छात्रों को धमकाया है उन्हें डिग्री लेने के बाद भी वकालत करने नहीं दिया जायेगा। आप को बता दें कि मनन कुमार मिश्रा बार कौंसिल के अध्यक्ष होने साथ साथ वो भाजपा राज्यसभा के सदस्य हैं। जब से देश में नरेंद्र मोदी पीएम बने हैं तभी से मनन मिश्रा बार कांउन्सिल के अध्यक्ष बने है। जैसे ही मनन कुमार मिश्रा ने एक्स पर अपने आदेश को पोस्ट किया वैसे ही आधी रात के बाद उनके इस विवादित पोस्ट पर देश भर के कानूनविदो और वकीलों और बार एसोसियेशन के पदाधिकारियों ने निंदा शुरू कर दी गयी सबसे पहले सीजेपी के अभिजीत दीपके व प्रवक्ता सौरव दास ने मनन कुमार के इस पोस्ट का विरोध जताया और कहा कि सीजेपी मनन कुमार के दिल्ली सरकारी आवास और कार्यालय के बाहर मोर्चा निकाल कर विरोध करेंगे। साथ देशव्यापी आदोलन कर मनन कुमार की आलोचना और निंदा करेंगे। इसे कहते थूकना और चाटना।चौतरफा निंदा और आलोचना के चलते मनन कुमार मिश्रा ने अपने नये पोस्ट में लिखा नालसार के सभी कानून डिग्रीधारक कहीं भी प्रैक्टिस करने का पंजीकरण करा सकेंगे। इसे कहते थूकना और चाटना। इस बात को लेकर सोशल मीडिया और समाचारों में यह विवाद खूब वायरल हो रहा है कि आखिर बीजेपी सांसद ने किस अधिकार के तहत यह लिखित बयान दिया है। कहीं यह बयान सस्ती लोकप्रियता पाने का स्टंट मात्र तो नहीं। ये भी हो सकता है कि सरकार और भाजपा को खुश करने के लिये यह शोशा छोड़ा गया है। मनन मिश्रा का यह प्रयास उल्टा पड़ गया है। वैसे भी मोदी सरकार अपनी कुर्सी बचाने के लिये जुगाड़ में जुटी हुई है।
—बार देखा गया
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