चेहरे पर चमक और रौब की जगह हताशा और निराशाआजादी की 179वीं वर्षगांठ पर एक बार फिर पीएम मोदी ने लाल किले के प्राचीर से तिरंगा लहराया लेकिन उनके चेहरे पर वो चमक, आत्मविश्वास और उल्लास नजर नहीं आया जो पहले दिखता था। उसका कारण देश की बदलती राजनीति और कमजोर होती सत्ता पर पकड़ हो सकती है। विपक्ष लगातार सत्ता और सरकार पर होता जा रहा है। 2024 के आम चुनाव में भाजपा को अपनी गिरती छवि और घटते कद का एहसास हो गया था। पीएम मोदी ने एक बार फिर अपने जुमलेबाजी का हुनर दिखाया। हमेशा की तरह इस बार भी 2014 की उपलब्ध्यिों का बखान किया। इस बार पीएम ने अपने पुराने संबोधन मितरों की जगह मेरे देशवासियों से किया। पिछली सरकारों का जिक्र करना उन्होंने जरूरी नहीं समझा। हां 12 साल में पहली उनकी जुबां पर प्रथम प्रधानमत्री जवाहर लाल नेहरू का आया। लेकिन उनकी उपलब्ध्यिों का कोई जिक्र नहीं किया। हर बार की तरह इस बार भी विपक्ष के लिये एक नये शब्द नक्सली दिमाग से पुकारा। इससे पहले वो अपने राजनीतिक विरोधियों को अर्बन नक्सल के नाम से पुकारते रहे है। सिर्फ दिखावे के लिये पीएम ने नेहरू जी का नाम लिया। भाषण में कई बार युवाओं को रिझाने का प्रयास एक और खास बात यह रही कि अपने 80 मिनट के भाषण में कई बार युवाओं को रिझाने का प्रयास किया। क्योंकि देश के युवाओं ने उनके दिन का चैन और रात की नींद उड़ा कर रख दी है। तकीकी से लैस युवाओं ने देश के यशस्वी और विश्वगुरु पीएम और चाणक्य को पानी पिला दिया। सिर्फ तीन माह पुरानी सीजेपी देश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा की चूल्हें हिला कर रख दीं हैं।भाषण में युवाओं के लिये लॉलीपॉप योजनाओं की घोषणाएं पीएम को सबसे बड़ा धक्का जेन जी और जेन अल्फा के उग्र तेवरों से दिख रहा है। इसलिये कई बार उन्होंने अपने भाषण में युवाओं के लिये लॉलीपॉप योजनाओं की घोषणाएं कि मसलन सिविल डिफेंस के जरिये युवाओं को रोजगार देने की योजना। एक करोड़ युवओं को आनलाइन शिक्षा की व्यवस्था की घोषणा के जरिये युवाओं को रिझाने का प्रयास किया। लेकिन युवा देश की शिक्षा व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार से बेहद नाराज हैं। इसी बात को लेकर सीजेपी और विपक्ष के दबाव में शिक्षा को हटाया गया। मोदी युवाओं को 2047 का सपना दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। जिन युवाओं का वर्तमान संकट में उन्हे 21 साल आगे का सपना दिखा कर मोदी अपना उल्लू सीधा करना चाह रही है। सबसे हैरत वाली बात है कि युवाओं की किसी समस्या और उसके निदान पर पीएम ने कोई टिप्पणी नहीं की। आज के भाषण में पीएम मोदी को आने वाले साल मे आधा दर्जन विधानसभा चुनावों की चिंता जरूर झलक रही थी। उनके भाषण को सुन कर लगा कि देश में कोई भी समस्या नहीं है सब तरफ चैन की बंसी बज रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि विपक्ष के दबाव में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ और अब गृहमंत्री अमित शाह समेत आधा मंत्रियों पर इस्तीफों का संकट गहराता दिख रहा है।हताश निराश पीएम को सरकार बचाने की चिंताइंडिया ब्लॉक दिन ब दिन मजबूत होता जा रहा है। लोकसभा में राहुल गांधी और राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे सरकार की फजीहत करने से बाज नहीं आ रहे हैं। संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने सरकार को आधा दर्जन मुद्दो पर घेरा उनमें पहला मुद्दा अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले और सीजेपी के नेतृत्व में संसद का घेराव कर रहे युवाओं पर दिल्ली पुलिस ने बेरहमी से लाठियां बरसायीं, आंसु गैस के गोले दागे,कील लगी लाठियों और बिजली के करंट देने वाले उपकरणों का उपयोग किया। पैलेट गन का इस्तेमाल पुलिस विभाग ने किसी के आदेश पर दिये गये। अगर शाह ने आदेश नहीं दिये तो विभाग पर शाह की पकड़ पर सवाल उठे हैं। इसलिये अमित शाह एक असफल और निष्क्रिय मंत्री हैं जो अपने विभाग पर नियंत्रण करने में पूरी तरह फेल हैं अत: हमारी मांग है कि गृहमंत्री इस्तीफा दें।
—बार देखा गया
क्या यह खबर उपयोगी लगी?

टिप्पणियां 0