पचास पचास लाख दे कर एमपी और विधायकों की खरीद फरोख्त

चुप क्यों संवैधानिक पदों पर बैठे लोग

सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने एक गंभीर सवाल किया है कि 50—50 करोड़ मे नेता बिक रहे कहां से आ रहा है इतना पैसा। राजनी​तिक जगत में भ्रष्ट और आपराधिक पृवत्ति के लोग सत्ताधारी दल में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में देश की संवैधानिक संस्थाएं सुप्रीमकोर्ट, चुनाव आयुक्त और जांच एजेंसियां सरकार के इशारों पर काम कर रही हैं। या अपनी ड्यूटी ईमानदारी से नही कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष का नेता पार्टी छोड़ता है वो भाजपा में शामिल हो रहा है। जिनका काम और कर्तव्य इन गैरसामाजिक और आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाना है। उनकी चुप्पी या कर्तव्यों के प्रति निराशा इस बात का प्रतीक है कि वो अपने दायित्वों से मुंह मोड़ रहे हैं।

पीएम केयर्स फंड घपले की जांच की मांग

पीएम केयर्स फंड के खुलासों पर सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने यह मांग की है कि पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है कि पचास पचास लाख दे कर एमपी और विधायकों की खरीद फरोख्त हो रही है। इसलिये यह जरूरी है कि पीएम केयर्स फंड की निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिये ताकि देश में जनप्रतिनिध्यिों की खरीद फरोख्त का खुलासा और रोक लग सके। सीजेपी के कोफाउन्डर आशुतोष रांका का शिक्षा मंत्री को खुला आफरकेन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से सीजेपी के हौसले काफी बुलंद हैं। सीजेपी की टीम अपने स्कूल ठीक करो अभियान के तहत देश भर में आडिट कर रही है। आशुतोष लौटकर एक बार फिर आशुतोष रांका राजस्थान आ गये हैं। CJP Leaders in offered Govt.उन्होंने राजस्थान सरकार में मंत्री मदन दिलावर को खुली चुनौती दी है कि मैं अपनी टीम के साथ राजस्थान में आ गया हूं आप अपनी सरकार के उन दस ऐसे विद्यालयों की लिस्ट दे दीजिये जो आपकी सरकार ने पिछले तीन सालों में बेहतर किये हैं। इस मामले पर शिक्षामंत्री दिलावर ने यह कह कर कन्नी काट ली कि उन्हें वीडियोग्राफी से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन वहां पढ़ रहे बच्चों कि निजता का मामला है। उनकी प्राइवेसी को कैसे सार्वजनिक किया जा सकता है। शिक्षा मंत्री के तर्क का कोई सिरपैर नहीं है। ज्ञानेश कुमार की तरह एक बेवकूफी भरा बयान है। मालूम हो कि राजस्थाना सरकार और जिला प्रशासन की ओर सरकारी स्कूलों की ओर एक पोस्टर लगा कर यह सूचित किया गया है कि बिना स्कूल
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