पुलिस की बर्बरता और होम मिनिस्टरी के हाथ पांव फूले
जंतर मंतर पर प्रदर्शन और सरकार की परेशानी
पूरे देश दिल्ली पुलिस और जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों की चर्चा चल रही है। प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की बर्बरता, बद्तमीज और बेहयायी और होम मिनिस्टरी की जमकर चर्चा निंदा की जा रही है। इसी बीच 3 अक्टूबर को जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शनों को कवर कर रही महिला पत्रकारों ने पुलिस के अफसर और जवानों पर अश्लील हरकत और बुरी तरह पिटायी को लेकर भी मोदी सरकार के गृहमंत्रालय की आलोचना की जा रही है। लगता है कि गृहमंत्री अमित शाह के कानों तक महिलाओं की आवाज पहुंच ही नहीं रही है। ऐसे में होम मिनिस्टरी एक मोलेस्टेशन के आरोपी एसीप विवेक भगत को डीसीपी का प्रमोशन देती है। सब लोगों को हैरानी हो रही है कि जिस एसीपी पर महिला के साथ अश्लील अभद्रता का आरोप लगा यह पूरे देश में चर्चा का विषय वायरल हो रहा है ऐसे कठिन वक्त में होम विभाग वारदात के अगले दिन उसको प्रमोट कर देता है। इस पर सोशल मीडिया पर गंभीर चर्चा चल रही है।
सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही है दिल्ली पुलिस और सरकार
सोशल मीडिया पर दो धड़े बने हैं एक धड़ा जो एसीपी भगत को अश्लीलता को लेकर ट्रोल कर रहा है। वहीं दूसरी ओर गोदी मीडिया समेत सत्ता समर्थक लोग एसीपी भगत के बचाव में उतर गये है। पीड़ित पत्रकार के चरित्र को बदनाम करने पर उतर गये है। यह एक महिला पत्रकार के दुव्र्यवहार का मामला नहीं बल्कि दो अन्य महिला पत्रकारों से जुड़ा मामला है जिनके साथ पुलिस कर्मियों ने बुरा बर्ताव किया है। इतना ही नहीं आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी बद्सुलूकी का आरोप लगाया है। दिलचस्प बात यह है कि होम डिपार्टमेंट आरोपी पुलिस अफसरों के खिलाफ जांच न करा कर उन्हें प्रमोशन दे कर हौसले बड़ा रही है। इस विवाद पर भी गृहमंत्रालय का बेतुकी सफाई दी जार रही है कि भगत के प्रमोशन की बात पहले प्रोसेस में थी। उन्हें अस्थाई तौर पर डीसीपी की जिम्मेदारी मिली है। जबकि ये बात सभी जानते हैं कि किसी भी सरकारी कर्मचारी के पोस्टिंग और तबादला अस्थाई ही होता है। मंत्रालय से लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर किस वजह से विवेक भगत को डीसीपी का अतिरिक्त पद भार सौंप दिया गया है। दूसरी ओर विवेक भगत ने पदोन्नति की बात से इनकार किया जा रहा है। जबकि उनके प्रमोशन को प्रमुख रूप से पब्लिश किया है।
गृमंत्रालय के इशारों पर बर्बरता हो रही है दिल्ली पुलिस
दो अक्टूबर गांधी जयंती से दिल्ली के जंतर मंतर चले रहे धरना प्रदर्शनों को काबू करने के लिये तैनात दिल्ली पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को लगाया गया है। इस बात की शुरूआत सीजेपी के 20 जुलाई के प्रदर्शन पर काबू पाने के लिये किया गया था। उस दौरान भी दिल्ली पुलिस पर बर्बरता और अमानवीय बर्ताव पर सवाल उठे थे। यह सवाल भी दिल्ली पुलिस के अफसरों और कर्मचारियों पर उठे कि वो सभी लोग बिना नेम प्लेट और बैज लगा कर प्रदर्शनकारियों पर लाठियां और मारपीट कर रहे थे। इस बात पर सुप्रीमकोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा था कि ऐसा क्यों किया गया। उस बात को हुए दो माह हो गये हैं। सुप्रीम कोर्ट के सवालों सरकार ने अभी तक जवाब नहीं है।

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