जंतर मंतर पर बिना बैज वाले अफसर कांस्टेबलों पर उठे सवाल, अफसरों का बचकाना जवाब

Delhi Police defending guilty personnels

दो अक्टूबर गांधी जयंती से दिल्ली के जंतर मंतर चले रहे धरना प्रदर्शनों को काबू करने के​ लिये तैनात दिल्ली पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को लगाया गया है। इस बात की शुरूआत सीजेपी के 20 जुलाई के प्रदर्शन पर काबू पाने के लिये किया गया था। उस दौरान भी दिल्ली पुलिस पर बर्बरता और अमानवीय बर्ताव पर सवाल उठे थे। यह सवाल भी दिल्ली पुलिस के अफसरों और कर्मचारियों पर उठे कि वो सभी लोग बिना नेम प्लेट और बैज लगा कर प्रदर्शनकारियों पर लाठियां और मारपीट कर रहे थे। इस बात पर सुप्रीमकोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा था कि ऐसा क्यों किया गया। उस बात को हुए दो माह हो गये हैं। सुप्रीम कोर्ट के सवालों सरकार ने अभी तक जवाब नहीं है। दो अक्टूबर से जंतर मंतर संस्थाएं व व​कीलों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया। इस दौरान भी पुलिस और सुरक्षाकर्मी बिना बैज और नेम प्लेट के प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाते और बर्बरता करते दिखे। यह समझा जा रहा था कि शायद सरकार पिछले अनुभव से सबक लेकर इस बार पुलिस कर्मियों को बिना बैज और नेम प्लेट के ड्यूटी पर नहीं भेजेगी। लेकिन इस बार फिर से दिल्ली पुलिस ने अपनी बेशर्मी जारी रखते हुए से जता दिया कि उसे अपनी छवि का कोई डर नहींं।

अफसर का बेतुका और बेवकूफाना बयान

दिल्ली पुलिस के एक अफसर बिना नेम प्लेट और बैज वाले मुद्दे पर कहा कि ऐसा इसलिये किया जा रहा है सोशल मीडिया पर उनको ट्रोल किया जा सकता है इसलिये बैज या नेम प्लेट नहीं लगा रहे है। हैरानी की बात है कि सिर्फ नाम से किसी को ट्रोल कैसे किया जा सकता है वैसे भी उनका चेहरा तो वीडियो में कैद हो रहा है। वैसे तो पूरे दिल्ली में दिल्ली पुलिस के जवान बिन बैज और नेम प्लेट के ड्यूटी करते। केवल जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते वक्त ही उनकी नेम प्लेट और बैज नहीं लगवाया जाता है। दरअसल ये इ​सलिये किया जाता है कि उनकी हरकतों और गल्तियों को छुपाने की लिये नेम प्लेट और बैज का हटा दिया जाता है। जब पत्रकार उनसे उनके बैज और नेम प्लेट के बारे में पूछते तो उनका जवाब होता कि यहीं गिर गया होगा या घर पर छूट गया है बिना प्लेट और बैज के क्या ड्यूट कानूनन मान्य है। संविधान के अनुसार बिना बैज और नेम प्लेट के पुलिस का कोई भी अफसर ड्यूटी नहीं कर सकता है।

बेखौफ पुलिस महिलाओं का मान मर्दन करने से नहीं चूक रही

इस बार तो दिल्ली पुलिस अफसरों और सिपाहियों पर महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें छेड़छाड़ और लाठियो डंडों से बुरी तरह पीटा सोशल मीडिया पर बहुत सारे वीडियो वायरल हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि एक एसीपी पर महिला पत्रकार के साथ सरेआम सार्वजनिक स्थल पर छेडछाड़ की उस पर कोई कार्रवाई न करते हुए उसे प्रमोट कर एडिशनल डीसीपी बना दिया गया है। इससे साफ जाहिर है कि मोदी सरकार ऐसे अपराधी मानसिकता वाले लोगों को तरक्की दे कर प्रोत्साहित करती है। इससे पहले भी सीजेपी प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन कर रही महिला को डीसीपी संदीप लांबा ने एकथप्पड़ जड़ कर हैरान कर दिया था। उसके खिलाफ आज तक कोई ऐक्शन नहीं लिया है।

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