सत्य निकेतन कांड: इमारत ढहने के बाद कुंभकरणी नींद से जागी दिल्ली सरकारदिल्ली हाईकोर्ट ने ​सरकार को फटकार कहा कि वो हादसे से पल्ला नहीं झाड़ सकती हैVinay Goelइतवार को लगभग दिन के एक बजे दिल्ली के एक पीजी सत्य निकेतन की इमारत भरभरा कर गिर गयी। 55 गज में बनी ये इमारत रहने वालों बच्चों की अकाल दर्दनाक मौ​त का कारण बन गयी। अभी तक सरकार के आंकड़ों के अनुसार 7 छात्रों की मौत हो गयी है तीन की हालत गंभीर बतायी जा रही है। लेकिन चर्चा इस बात की हो रही है कि इस बिल्डिंग में भारी संख्या में छात्र छात्राएं पीजी पर रह रही है। अभी भी सरकार ने जानकारी नहीं दी है कि सत्य निकेतन पीजी में कितने बच्चे रह रहे थे। हैरानी की बात यह है कि 28 घंटों से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन सरकार ने इस बात की पूरी जानकारी नहीं दी है कि कुल कितने छात्र थे कितने बच्चों की मौत हुई है। एनडीआरएफ के निदेशक ने सात के मरने की बात अपनी रिलीज में दी है। इस बात की चर्चा विपक्ष कर रहा है कि दिल्ली सरकार का ऐसा रवैया बन गया है कि दर्दनाक हादसे होने के बाद लीपापोती करती है इससे 4 माह पहले भी दिल्ली के होटल में आग लगने से 23 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी जिसमें बहुत से विदेशी नागरिक थे जो अपना इलाज कराने ने मैक्स अस्पताल में आये हुए थे। उस हादसे से भी दिल्ली सरकार एमसीडी और अन्य विभागों ने सीख नहीं ली और सत्या निकेतन का कांड हो गया। सरकार नें खानापूरी करी और कुछ छोट कर्मचारियों पर कार्रवाई कर इति श्री कर ली गयी। ये देखा जा रहा है कि जब कोई कांड होता है तो सरकार कुछ गहमा गहमी दिखाती है बाद में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।सीजेपी आंदोलन के बाद सत्या निकेतन कांड से अमित शाह घेरे में जुलाई माह में सीजेपी ने शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और अनैतिकता के आधार पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र1 प्रधान का इस्तीफा मांगा था मजबूत और बाहुबली सरकार होने के बावजूद प्रधान का इस्तीफा हो गया। फिर मानसून में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने यह मांग की कि मोदी शाह सदन में आकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर बर्बरता पूर्ण लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर अपना बयान दें। इस पर विपक्ष ने अमित शाह के इस्तीफा मांगा। विपक्ष के सामने न तो पीएम मोदी आयो और न ही अमित शाह सदन में आये। इस नये कांड से एक बार फिर अमित शाह और सीएम रेखा गुप्ता विपक्ष के निशाने पर आ गये हैं।सत्य निकेतन कांड से मोदी सरकार सहमी इस दर्दनाक हादसे की आग से मोदी सरकार बुरी तरह झुलस गयी है। इमारत गिरने वाले हादसे की खबर जब होम मिनिस्टर अमित शाह को हुई तो वो गोआ में भाजपा के नये भवन के उद्घाटन करने वाले थे। वो बिना उद्घाटन के वापस दिल्ली लौट गये। इस बात को लेकर विपक्ष ने केन्द्र सरकार को आड़े हाथ लिया और भाजपा की नीतियों में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषय नहीं हैं। कांग्रेस ने आलोचना करते हुए कहा कि पिछले 14 सालों में सरकार ने एक भी छात्रावास नही बनाये है। 3 लाख 30 हजार से अधिक बच्चे बाहर से दिल्ली विवि में पढ़ाई के​ लिये आते हैं। छात्रावासों में इतने छात्रों के लिये मात्र साढ़े सात हजार सीट ही हैं। ऐसे में बाहर से पढ़ने आये बच्चों को मजबूरन प्राइवेट पीजी में रहना पढ़ता है। प्राईवेट पीजी संचालकों को सत्ताधारी दल के विधायकों और इलाकाई नेताओं को संरक्षण प्राप्त रहता है जो पढ़ने वालो छात्रों का आर्थिक मानसिक शोषण करते है। दिल्ली में सैकड़ों अवैध पीजी नेताओं की शह पर चल रहे बताया जा रहा है कि ये इमारत गैर कानूनी ढंग से पीजी चला रही थी। अधिकतर बच्चे अपनी पढ़ा करने के लिये दिल्ली यूनिवर्सिटी आते हैं। बाहर से पढ़ाई करने के लिये साढ़े तीन लाख बच्चे आते हैं। ये आरोप लग रहा है कि यहां चल रहे सभी पीजी अवैध रूप से हैं इन्हें स्थानीय बीजेपी विधायक के भाई की शह पर चलाये जा रहे हैं। एक छोटे से कमरे में दो बच्चों को किराये पर दिया जा रहा है। सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली में भाजपा की सरकार है स्थानीय विधायक व पार्षद भाजपा भाजपा का हैं। एलजी भी भाजपा का है साथा पीएम भाजपा के हैं। इसके बावजूद दिल्ली में लगातार इमारतों में आग लगने और ढहने की वारदातें हो रही हैं। एक सवा साल में 98 लोग अपनी जानें गवां चुके हैं।
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