नरेंद्र मोदी देश के पीएम या भाजपा और संघ के तारनहार!
एनडीए सरकार में सरकार और पीएम की छवि बचाने की मुहिम
इस बार का 17 सितंबर कई मायनों में इतिहास में दर्ज हो गया है। पीएम नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन तो था ही इसे भाजपा या यूं कहें कि स्वयं पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी छवि को धूमिल होने से बचाने का प्रयास किया गया। जिस तरह से पूरे देश में केन्द्र सरकार और एनडीए के घटकों ने पीएम के जन्मदिन पर दीया जलाने का बेजा दबाव बनाया। सरकारी मशीनरी को इस कार्यक्रम को स फल बनाने में झोंक दिया गया। भाजपा शासित राज्यों अफसरों ने सारी शर्म हया बेच कर आदेश जारी कर सरकारी कर्मचारियों को कार्यक्रम आयोजित करने का आदेश दिया। ऐसा पहले कभी नहीं देखने का मिला है। भाजपा और सरकार को इस बात का एहसास हो गया है कि पीएम मोदी का जादू और महिमा दिन ब दिन फीकी पड़ती जा रही है। पीएम मोदी जनप्रिय छवि को कितना महत्व देते हैं ये बात किसी से छुपी नहीं है। आम जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के करोड़ों रुपये को पानी की तरह बहा कर नरेंद्र मोदी की छवि देश व विदशों बनायी गयी है। मोदी और भाजपा आसानी से इसे खत्म नहीं होने देंगे उसी प्रयास में नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर आर्शीवाद का दीया देश की रोती बिलख्ती आम जनता से जबरन जलवाया गया। लगता है कि बिहार और असम भारत के हिस्से ही नहीं है। एक तरफ लोग अपनी जिंदगी की समस्याओं से जूझ रहे हैं। दूसरी ओर बेबस और निरीह जनता से मोदी के जन्मदिन पर आशीर्वाद का दीया जलाने की सलाह दे रहे है।
देश में गंभीर समस्याओं के साथ कंगाली के आसार
देश में पिछले कई माह से यह देखा जा रहा है कि सरकार की नाकामी के कारण आर्थिक, सामाजिक और संवैधानिक संकट गहराता जा है। एक तरफ देश के अनेक हिस्सोंं में बाढ का प्रकोप जारी है करोड़ों लोग प्राकृतिक आपदा के शिकार हो गये हैं। उनके पुनर्वास की चिंता करते हुए प्रदेश सरकारें पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर आशीर्वाद का दीया जलाने का फरमान जारी कर रही है। जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान की तो कभी भाजपा सरकारों ने कान नहीं धरे हैं। केवल उनका दिमाग इस बात में लगा रहता है कि किस तरह आम जनता को धर्म और आस्था के गोरख धधे में उलझा कर अपना उल्लू सीधा रखें। आम जनता को मुस्लिम से खतरा होने की बात कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। सरकार और भाजपा नेता अपनी कमियों को छुपाने के लिये हमेशा कांग्रेस की कमियों का सहारा लेकर सारा दोष उन पर मढ़ देते हैं।
सरकार के पास सरकार चलाने के लिये भी संकट
सरकार के पास सरकार चलाने के लिये भी संकट है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन देने के भी लाले पड़ रहे हैं। मोदी सरकार ऐसे हालाता से जूझ रही है। लेकिन उसे सूझ नहीं रहा है कि सरकार को चलाये रखने के लिये 8 लाख करोड़ की व्यवस्था कैसे की जाये। वित्त मंत्रालय ने इस दुविधा से निपटने के लिये एक बार फिर आम जनता को शिकार बनाया है। डिजिटल पेमेंट को लेकर ऐसा कानून बनाने का फरमान जारी किया जिससे आर्थिक भार आम जनता के सिर पर बढ़ेगा। पिछले 10 साल में मोदी सरकार ने आम जनता को डिजिटल पेमेंट करना आदी कर दिया और अब मोदी सरकार उनकी इस मजबूर का फायदा उठाने की साजिश कर रही है। अगले माह अक्टूबर से नये नियम के अनुसार 2000 से अधिक के डिजिटल पेमेंट पर सरकार 0.04 प्रतिशत का टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है। ऐसा लगता है कि सरकार ऐसे ही तरीके अपना कर सरकार चलाने का इंतजाम कर रही है।
पीएम मोदी के बेतुके बयान और आम जनता
आपको याद होगा कि जैसे ही देश में पांच प्रदेशों में हुए चुनावों के परिणाम आये वैसे पीएम मोदी के देश में अनेक संकट याद आ जाते है। लेकिन पांच प्रदेशों में हो रहे चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी को न तो ईरान अमेरिका का युद्ध नजर आया न पेट्रो प्रोडक्टस की किल्लत न आयी और न ही रसोई गैस की कमी। लेकिन जैसे ही चुनाव परिणाम आते हैं वैसे ही उन्हे देश की आर्थिक हालात और ऊर्जा संकट नजर आने लगते हैं। वो जनता के सामने आ कर यह कहते हैं कि देश के हालात देख कर सरकार का सहयोग करें। कम ईंधन खर्च करें, बेवजह घूमने के लिये विदेश न जायेे। यहां तक घरेलू रसोई के खर्चों में भी कटौती करें यहां तक कि खाद्य तेलों का कम उपयोग करें। लेकिन चार माह बाद पीएम मोदी के जन्मदिन पर आशीर्वाद के नाम करोड़ों रुपये के दीयों और तेल के उपयोग के बीजेपी और सरकारें आम जनता को मजबूर कर रहे है। गजब का लॉजिक ढूंढ कर लाते हैं बीजेपी के नेता। लोग कहते हैं भाजपा में प्रगति का एक ही मूलमंत्र है कि एक नंबर का जाहिल और लंपट होना जरूरी है।
नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और जनता की उदासीनता
ऐसा
लगता ही नहीं कि
नरेंद्र मोदी देश के
पीएम हैं ही नहीं
वो तो सिर्फ न्यू
भाजपा और संघ के
लिये ही पीएम बने
हैं। उनके लिये देश
की जनता प्राथमिकता कभी
रही नहीं। वो चुनावों में
देश का हित बल्कि
भाजपा और अपने लिये
ही चुनाव जीतते दिखे हैं। आम
जनता के पीएम वो
बनने का प्रयास नहीं
करते थे बल्कि वो
सिर्फ भाजपा के ही पीएम
बन कर रहे। देश
के हालात गंभीर हैं देश आर्थिक
सामाजिक और संवैधानिक संकटों
से जूझ रहा है।
देश और विदेशों में
भारत की छवि गिर
रही है लेकिन एनडीए
सरकार और पीएम मोदी
इस सच से मुंह
मोड़ कर बैठे हैं।
ऐसे में देश का
मीडिया अपनी नैतिेकता और
कर्तव्य को दर किनार
का सत्ता के साथ चहल
कदमी कर रहा है।
लगता है कि प्रेस
और सत्ता बीच सामंजस्य बिठा
लिया गया है।

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