किसी भी वक्त गिर सकती है केन्द्र की मोदी सरकार!

देश में मोदी विरोधी लहर और राहुल गांधी की आंधी

सोशल मीडिया में यह चर्चा चल रही है कि यदि इस वक्त आमचुनाव हो जाये तो बीजेपी को 100 सीट भी नहीं मिल सकेंगी। इन सब बातों की चिंता में सरकार और मोदी शाह नित ऐसे मामलों को उठा रहे हैं जिनसे जनता को गुमराह किया जा सके। देश का युवा बेरोजगारी और भ्रष्यटाचार को लेकर किसान अपनी खेती किसानी की समस्याओं को लेकर और महिलायें अपनी सुरक्षा और महंगाई को लेकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर नाराजगी दिखा रहा है। आज के हालात में केन्द्र की मोदी सरकार खस्ता हाल में दिख रही है। सरकार जो भी फैसला ले रही है वो विवाद में पड़ता दिख रहा है। देश का हर वर्ग सरकार के रवैये और कार्यप्रणाली से नाराज दिख रहा है। पिछले 12 सालों से केन्द्र में एनडीए की सरकार चल रही है और देश की कमान नरेंद्र मोदी के हाथों में है। ऐसे में सत्ता के हाथों में संवैधानिक संस्थाओंं चुनाव आयोग, जांच एजेसियां ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई की कमान है। इसके साथ ही देश की मीडिया भी सत्ता के प्रभाव में सरकार की जूतियां चाट रही है। जनसरोकारों से उसका कोई नाता नहीं दिख रहा है। इसके अलावा संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भाजपा व संघ की सोच के साथ खड़े दिख रहे हैं। पिछले 12 सालों से सत्ता ने विपक्ष को कुचलने का काम किया है।

12 सालों से झूठ और जुमलों की सरकार

2014 में जब नरेंद्र मोदी पीएम का चेहरा बनाये गये तब देश के कोने कोने में जा कर कांग्रेस की नीतियों की जमकर आलोचना करते नहीं थकते थे। लेकिनआज के समय में पीएम के रूप में सबसे ज्यादा आलोचना का शिकार हो रहे हैं। 214 के चुनाव प्रचार के दौरान मोदी कांग्रेेस सरकार और पीएम डा मनमोहन सिंह पर जमकर हमले किया करते थे। सरकार पर भ्रष्टाचार, गरीबी खेती किसानी की बदहाली पर पीएम और कांग्रेस को कोसते थे। तब उन्होंने अपने भाषणों में दो करोड़ नौकरियां और 15 15 लाख हर देशवासी के खाते में आने का सपना दिखाया था। 12 साल से देश पर राज करने वाले पीएम मोदी पर विपक्ष उन जुमलों को लेकर सरकार को घेर रहा है। लेकिन केन्द्र व राज्य सरकारें उन्हें उनके मुद्दों से भटकाने के लिये बेवजह हिन्दू मुस्लिम और धार्मिक उन्माद में उलझाने की साजिश में जुटा है।

चुनाव आयोग और मोदी सरकार की साजिशों का खुलासा

पिछले पांच सालों से विपक्ष केन्द्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग की मितीभगत का आरोप लगा रहा है। लेकिन देश की प्रमुख मीडिया सरकार की चाकरी में लगी है। वो सही मायने में जनसरोकारों को उठाने की जगह सरकार की आरती गाने में व्यस्त है। लेकिन कहते हैं कि झूठ के पांव नहीं होते हैं कितनी ​चतुरायी से बोला जाये पोल खुल ही जाती है। चुनाव आयोग की करतूतें सामने आती जा रही हैंं। सबसे पहले चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव में एसआईआर की आड़ में एडीए के लिये जीत की नींव रखी। लगभग 60 लाख वोटर्स का नाम लिस्ट से काटे गये। उन्हीं लोगों के वोट काटे गये जो विपक्ष के समर्थक बताये जाते थे। विपक्ष आरोप लगाता है कि भाजपा और समर्थकों के नाम भारी संख्या में वोटर लिस्ट में जोड़े गये। सभी का खुलासा अब होने लगा है। लेकिन दिलचस्प बात यह है अदालतों में विपक्ष की शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एसआईआर को लेकर अभी भी सुप्रीमकोर्ट में सुनवायी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के रवैये लगा कि वो चुनाव आयोग को सवाल से बचना चाहता है। दूसरी ओर चुनाव आयोग एसआईआर को ​मनमाने ढंग से लागू करता जा रहा है।

दिल्ली और प बंगाल में एसआईआर में गडबड़ी का खुलासा

प बंगाल और दिल्ली विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने किस तरह धां​धलियां की है इस बात का खुलासा न्यूज लॉर्डी की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है। चुनाव आयोग ने प बंगाल में जो एसआईआर कराया वहां एक नयी प्रणाली तार्किक विसंगतियों का एक प्रयोग किया जिसके तहत 38 लाख से अधिक लोगों के नाम काटे गये। इस बात को लेकर विपक्षी दल टीएमसी ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में उठाया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ममता बनर्जी की बात सुनने को तैयार नहीं हुआ। नतीजा सबके सामने आया प बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत हुई पहली बार प बंगाल में भाजपा का मुख्यमंत्री बना। सबसे हैरानी वाली बात यह है प बंगाल में भाजपा ने अपने किसी नेता को सीएम बनाते हुए पूर्व टीएमसी नेता सुबेंदु अधिकारी को प बंगाल की कमान सौंप दी। दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही प बंगाल में चुनाव आयोग की करतूतों का खुलासा शुरू हुआ कि गोदाम रखी 4000 ईवीएम आग में जलकर भस्म हो गयी। अब किस बात की जांच होगी सबको समझ आ गया कि यह आग लगी नहीं बल्कि जानबूझ कर लगवायी गयी थी। दूसरी ओर जिन लोगों के वोट काटे गये वो कोर्ट में सुनवाई के बाद मतदान होने के बाद फिर से जोड़ दिये गये।

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