करोड़ो की सख्या में वोट कट गये किसी को कोई परवाह नहीं

चुनाव आयोग और उच्चतम न्यायालय की चुप्पी पर हैरानी

पिछले साल से देश के अनेक हिस्सों में चुनाव आयोग लगातार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चलाया जा रहा है। इसके प्रोसेस और टाइमिंग को लेकर समूचा विपक्ष चुनाव आयोग और मोदी सरकार को घेर रहा है। लेकिन सरकार और चुनाव आयोग बेखौफ हो कर लगातार विशेष सघन पुनरीक्षण करवाये जा रहे है। समाचारों की मानें तो देश में एसआईआर के माध्यम से साढ़े ग्यारह करोड़ अधिक वोटरों के नाम लिस्ट से बाहर कर दिये गये हैं या उनके काटे जाने की आशंका है। हैरानी की बात यह है कि चुनाव आयोग की इस तरह की प्रक्रिया पर सुप्रीमकोर्ट की चुप्पी पर सवाल निशान उठना शुरू हो गये हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने अपनी मंशानुरूप चुनाव आयोग में अपने खास नौकरशाहों को तैनात करवा दिया ताकि होने वाले चुनावों में अपनी सहुलियत के अनुसार चुनाव कार्यक्रम तय कराये जा सके। वर्तमान में जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं वो गृहमंत्री अमित शाह के करीबी विश्वसनीय बताये जाते हैं। सीईसी बनने के पहले ज्ञानेश कुमार सहकारिता मंत्रालय मे अमित शाह के साथ काम कर चुके हैं। पिछले जितने भी मुख्य चुनाव आयुक्त हुए हैं उनमे राजीव कुमार और ज्ञानेश कुमार पर सबसे ज्यादा और गंभीर आरोप लगाये जा रहे हैं। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सरे आम चुनाव आयोग पर पक्षपात करने का आरोप कई बार लगा चुके हैं। वोट चोरी और एसआईआर में भ्रष्टाचार के संगीन आरोप इंडिया ब्लाक के नेता लगातार लगा रहे हैं।

दिल्ली में लगभग 53 लाख लोगों का नाम वोटर लिस्ट से बाहर

दिल्ली में लगभग 53 लाख लोगों का नाम वोटर लिस्ट से बाहर करने की बात चर्चा में हैं। हैरानी की बात यह है कि चुनाव आयोग द्वारा दिल्ली में चलाये जा रहे एसआईआर में दिल्ली के बहुत सारे नामचीन लोगों के साथ राजनेताओं को चुनाव आयोग ने नोटिस भेज तय समय के अंदर जवाब मांगा है। केवल दिल्ली में 53 लाख लोगों को एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से बाहर क​र दिया गया है। मीडिया संस्थान न्यूज लांड्री और रिपोर्टर्स कलेक्टिव की एक रिपोर्ट ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार ऐसे बहुत से लोगों के नाम लिस्ट से बाहर कर दिया गया है जिनकी झुग्गी झोपड़ी डीडीए ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर तोड़ दी थी। अधिसंख्यलोग वही बताये जा रहे हैं। यह भी पता चला है कि गैर पढ़े लिखे लोगों के पास चुनाव आयोग अंग्रेजी में नोटिस ​भेज रहा है। दूसरी लोगों की शिकायतें कि जब भी वो लोग बीएलओ के पास मदद को जाते हैं तो उनको डांट कर भगा दिया जाता है। ऐसे में ये लोग अपनी बात भी चुनाव आयोग के सामने नहीं रख पा रहा है। उनका पक्ष न सुने ही उनका नाम दिल्ली वोटर लिस्ट से काटने की आशंका लोगों में बैठ रही है।

चुनाव आयोग और मोदी सरकार की साजिशों का खुलासा

पिछले पांच सालों से विपक्ष केन्द्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग की मितीभगत का आरोप लगा रहा है। लेकिन देश की प्रमुख मीडिया सरकार की चाकरी में लगी है। वो सही मायने में जनसरोकारों को उठाने की जगह सरकार की आरती गाने में व्यस्त है। लेकिन कहते हैं कि झूठ के पांव नहीं होते हैं कितनी ​चतुरायी से बोला जाये पोल खुल ही जाती है। चुनाव आयोग की करतूतें सामने आती जा रही हैंं। सबसे पहले चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव में एसआईआर की आड़ में एडीए के लिये जीत की नींव रखी। लगभग 60 लाख वोटर्स का नाम लिस्ट से काटे गये। उन्हीं लोगों के वोट काटे गये जो विपक्ष के समर्थक बताये जाते थे। विपक्ष आरोप लगाता है कि भाजपा और समर्थकों के नाम भारी संख्या में वोटर लिस्ट में जोड़े गये। सभी का खुलासा अब होने लगा है। लेकिन दिलचस्प बात यह है अदालतों में विपक्ष की शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एसआईआर को लेकर अभी भी सुप्रीमकोर्ट में सुनवायी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के रवैये लगा कि वो चुनाव आयोग को सवाल से बचना चाहता है। दूसरी ओर चुनाव आयोग एसआईआर को ​मनमाने ढंग से लागू करता जा रहा है।

दिल्ली और प बंगाल में एसआईआर में गडबड़ी का खुलासा

प बंगाल और दिल्ली विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने किस तरह धां​धलियां की है इस बात का खुलासा न्यूज लॉर्डी की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है। चुनाव आयोग ने प बंगाल में जो एसआईआर कराया वहां एक नयी प्रणाली तार्किक विसंगतियों का एक प्रयोग किया जिसके तहत 38 लाख से अधिक लोगों के नाम काटे गये। इस बात को लेकर विपक्षी दल टीएमसी ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में उठाया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ममता बनर्जी की बात सुनने को तैयार नहीं हुआ। नतीजा सबके सामने आया प बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत हुई पहली बार प बंगाल में भाजपा का मुख्यमंत्री बना। सबसे हैरानी वाली बात यह है प बंगाल में भाजपा ने अपने किसी नेता को सीएम बनाते हुए पूर्व टीएमसी नेता सुबेंदु अधिकारी को प बंगाल की कमान सौंप दी। दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही प बंगाल में चुनाव आयोग की करतूतों का खुलासा शुरू हुआ कि गोदाम रखी 4000 ईवीएम आग में जलकर भस्म हो गयी। अब किस बात की जांच होगी सबको समझ आ गया कि यह आग लगी नहीं बल्कि जानबूझ कर लगवायी गयी थी। दूसरी ओर जिन लोगों के वोट काटे गये वो कोर्ट में सुनवाई के बाद मतदान होने के बाद फिर से जोड़ दिये गये।

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