Know truth about Special Excutive Magistrate-आप जानते हैं कि एसईएम जो प्रदर्शनकारियों को जेल भेेज रहा
पिछले पांच माह से दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी, कांग्रेस, सिविल सोसाइटी, अधिवक्तागण, इंडिया ब्लाक, आईसा कार्यकर्ता और बेरोजगार युवा लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने सीजेपी के 2 बड़े नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को इसलिये गिरफ्तार किया कि उन्होंने जंतर मंतर पर तिरंगा फहराने का काम किया था। पुलिस ने इसके विरोध में दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें स्पेशल एक्जक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। इस बीच सीजेपी की तरफ से नियुक्त एडवोकेट को मिलने की अनुमति भी नहीं दी गयी। मजिस्ट्रेट ने दिल्ली पुलिस के कहने पर वहीं से दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल मे 5 दिनों के लिये न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ये घटना 13 अक्टूबर की बतायी जाती है। 14 को पुलिस ने एसईएम मीणा के सामने पेश किया। एसईएम के आदेश पर 17 तारीख को सुनवायी करने को कहा गया। लेकिन की एसईएम 16 को सुनवायी के एसईएम मीणा अपने कार्यालय 11 बजाय 5 बजे पहुंचे और सुनवायी करने के बजाये उन्होंने यह कह कर टाल दी कि उनको सीजेपी नेताओं को जल्दी रिहा करने की धमकी दी गयी है। यानि कि सीजेपी के नेताओं को दो दिनों की रिमांड बड़ा दी। दो दिन बाद भी एसईएम ने मामले की सुनवायी को टाल दिया गया। दूसरी ओर कोर्ट 26 तक के लिये बंद हैं। वैसे कोर्ट में दूसरे ड्यटी जज रहते हैं लेकिन एसईएम उनके मामले को लंबित करने में इच्छुक हैं। मामले की सुनवायी करने से कतरा रहे है। विपक्ष और सीजेपी इसे साजिश करार दे रहा है। उनका कहना है कि दिल्ली पुलिस के इशारों पर दोनों नेताओं को रिमांड के नाम पर जेल में रख रहे हैं।
इसे समझिये कौन होते हैं एसईएम
अब बताते हैं कि आखिर स्पेशल एग्जक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कैसे चुना जाता है। ये किसी जुडिशयरी परीक्षा पास करके नहीं बनाये जाते हैं। दरअसल ये एसीपी रैंक के दिल्ली पुलिस के अधिकारी होते हैं। जो दिल्ली पुलिस के अधीन काम करते हैं। तो समझ सकते हैं कि एसईएम सीजेपी नेताओं को रिहा करने या जमानत देने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। दरअसल इस बात का खुलासा तो तब हुआ जब हाईकोर्ट ने आठ साल पहले एक मामले की सुनवायी करते हुए जज ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि आखिर ये एसईएम क्या बला है इनकी नियुक्ति कैसे की जा रही है। तब जा कर सामने आया कि सीआरपीसी की एक धारा के तहत इस पद का सृजन किया गया है। यानि की यह दिल्ली पुलिस का ही एक विभाग है जो एक पोलिस स्टेशन अंदर चलाया जा रहा है। साफ हो गया कि जब दिल्ली पुलिस किसी को गिरफ्तार कर एसईएम के सामने पेश करती है तो उसकी बेल पुलिस की मेहरबानी पर ही संभव होती है। साफ बात है कि एसईएम पुलिस की सिफारिश पर ही हो सकती है। ऐसे में एसईएम गिरफ्तार आरोपी को एक सप्ताह के लिये जेल भेज दिया जाता है। इस तरह दिल्ली पुलिस किसी को गिरफ्तार करती है उसको दिल्ली पुलिस के अफसर के सामने पेश किया जाता जहां से उसे जेल भेज दिया जाता है। सामान्य लोग समझते हैं कि मजिस्ट्रेट निष्पक्ष रूप से काम कर रहा है।

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