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पिछले 15 दिनों से देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है। अब तक चार प्रदेशा में चुाव संपंन्न हो चुके हैं केवल पं बंगाल में ही चार चरणों का मतदान बाकी है। प बंगाल में चुनाव आयोग ने आठ चरणों में मतदान कराने का फैसला किया है। केरल, तमिलनाडु, पुड्डूचेरी, व असम में चुनाव कार्यक्रम पर भी लोगों ने सवाल उठाये थे कि तीन प्रदेश तमिलनाडु, केरल और पुड्डूचेरी में चुनाव एक दिन में कराये गये। असम में चुनाव की प्रक्रिया केवल 3 चरणों में संपन्न कराया गया। प बंगाल में 294 सीटों के लिये चुनाव के लिये आठ चरणो में कराने का चुनाव आयोग का निर्णय किसी के गले से नीचे नहीं उतर रहा है। लेकिन चार प्रदेशों में चुनाव संपन्न होने के बाद यह साफ दिखने लगा है कि चुनाव आयोग ने केन्द्र सरकार के इशारे पर ही वेस्ट बंगाल में चुनाव कराने का फैसला लिया गया ताकि ममता को हराने के लिये भाजपा अपना सारा दम खम लगा सके। ममता पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार करने में सफल नहीं हो सकेंगी। इस बीच उनके पैर में चोट लगने के कारण वो व्हील चेयर पर चुनावी रैलियां व सभायें कर रही हैं। मोदी सरकार ने टीएमसी ओर ममता को परेशान करने के लिये ईडी और सीबीआई को भी लगा दिया ताकि चुनाव में प्रचार छोड़ अपने बचाव में लग जायें।
इससे पहले के चार चरणों भी पीएम मोदी से लेकर अमित शाह, जेपी नड्डा, योगी, शिवराज के साथ केन्द्रीय मंत्रियों ने ममता को घेरने का पूरा प्रयास किया। भाजपा की रणनीति यह है कि दीदी को घे रने के लिये अब पूरी तरह से तैयार है क्यों कि चार प्रदेशों में चुनाव निपट जाने के बाद बीजेपी को केवल प बंगाल फतेह करने की चिंता है। ममता दीदी की बात करें तो उनकी पार्टी में केवल वहीं स्टार प्रचारक हैं। उन्हें बीजेपी ने नंदीग्राम में बांध कर रख दिया है। ममता ने नंदी ग्राम से पर्चा कर इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। बीजेपी वहां से पूर्व मंत्री शुभेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी ने ऐसे हालात बना दिये कि ममता नंदीग्राम में ही सिमट कर रह गयी है। बीजेपी के लिये दोनों ंहाथ में लड्डू हैं अगर ममता दीदी यहां से हारती हैं तो टीएमसी के वजूद पर संकट गहरा जायेगां अगर शुभ्ेंादु अपनी सीट नहीं बचा पाये तो उनकी भाजपा में कोई हैसियत नहीं रह जायेगी। साथ ही चुनाव आयोग ईडी, आयकर विभाग के साथ सीआरपीएफ भी केन्द्र सरकार के इशारे पर काम कर रहा हैं ऐसा टीएमसी का कहना है। ममता समेत कई टीएमसी नेताओं को आयोग नोटिसें थमा चुका है। वहीं भाजपा के नेताओं पर चुनाव आयोग की विशेष कृपा रहती है। बीजेपी के एक नेता पर पहले 48 घंटों पर चुनाव प्रचार करने पर रोक लगायी लेकिन अगले दिन ही उसकी रोक 24 घंटे में तब्दील कर दी गयी। इस पर कांग्रेस महसचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट चुनाव आयोग पर तंज भी कसा था।








