कोरोना संक्रमण का शिकार हुए मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन को रामबाण माना जा रहा है। देश भर में इन दिनों इस इंजेक्शन की खूब मांग है और कई राज्यों में तो किल्लत पैदा हो गई है। इस संकट के बीच डॉक्टरों का कहना है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की यदि कमी हो जाती है, तब भी घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना को हराने के लिए यही एकमात्र उपाय नहीं है। इसकी बजाय ऑक्सीजन थेरेपी, विटामिन सप्लीमेंट्स, स्टेरॉयड्स और ब्लड थिनर्स के जरिए भी मरीजों को आसानी से कोरोना से उबारा जा सकता है।

यहां तक कि 12 अप्रैल को महाराष्ट्र की स्टेट टास्क फोर्स की मीटिंग में भी मेडिकल एक्सपर्ट्स ने यह क्लियर किया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन के बिना भी मरीजों को कोरोना से बचाया जा सकता है। महाराष्ट्र की कोविड टास्क फोर्स के चीफ संजय ओक कहते हैं कि रेमडेसिविर की सलाह काफी डॉक्टर दे रहे हैं। इसके चलते मांग में इजाफा हुआ है। यहां तक कि लोग इस इंजेक्शन को ही कोरोना से निपटने का एकमात्र उपाय मानने लगे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। एक अन्य मेडिकल एक्सपर्ट ने कहा कि मरीजों के परिजनों को डॉक्टरों पर इसी इंजेक्शन के इस्तेमाल के लिए दबाव नहीं बना चाहिए।

एक एक्सपर्ट ने कहा कि यह इंजेक्शन बीमारी की अवधि को कम करने में मदद करता है। इसके चलते कुछ लोग इसे जीवन रक्षक मानने लगे हैं, लेकिन यह हकीकत नहीं है। उन्होने कहा कि अकेले रेमडेसिविर से ही कोरोना के पीड़ितों को फायदा नहीं होता है। इसके साथ ही ऑक्सीजन थेरेपी, स्टेरॉयड्स और ब्लड थिनर्स के जरिए भी मरीज को राहत मिलती है। यह कुछ चुनिंदा मरीजों के लिए ही बेहतर है, जो गंभीर रूप से पीड़ित हैं और तत्काल राहत की जरूरत है। 



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