ब्रिटेन में कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से बुधवार पहली बार एक दिन के भीतर कोई मौत दर्ज नहीं की गई। बीते 52 दिन में यहां रोजाना मौत का आंकड़ा 40 से शून्य तक जा पहुंचा है। आश्चर्य की बात यह भी है कि कोरोना के नए स्वरूप के कारण यहां संक्रमण में अचानक वृद्धि हुई है, इसके बावजूद किसी मरीज की मौत नहीं हुई। तो चलिए जानते हैं कैसे ब्रिटेन को मिली यह कामयाबी।

तीन हजार केसों पर भी कोई मौत नहीं 
ब्रिटेन के मंगलवार को जारी हुए डाटा के अनुसार, यहां एक दिन के भीतर 3165 नए संक्रमित मरीज मिले, जबकि एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। बीते दस अप्रैल को यहां चौबीस घंटों के भीतर 40 मौतें दर्ज हुई थीं जिसके बाद से रोजाना संक्रमण में लगातार गिरावट बनी रही और 52 दिन के बाद यह आंकड़ा शून्य हो गया। 

दस महीने बाद यहां तक पहुंचे 
सरकार ने जानकारी दी है कि जुलाई, 2020 के बाद पहली बार ब्रिटेन में एक दिन के भीतर शून्य मौत दर्ज की गई। ब्रिटेन में अब तक 4,490,438 मरीज संक्रमित हो चुके हैं जबकि  कुल 127,782 मरीजों की मौत हो चुकी है। 

तीसरी लहर के शुरूआती दौर में ब्रिटेन  
हाल में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को सलाह देते हुए सलाहकार वैज्ञानिकों के एक दल ने कहा है कि ब्रिटेन में संक्रमण की तीसरी लहर की शुरूआत हो चुकी है। अभी यहां की पॉजिटिविटी दर 2.5% है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह रोजाना संक्रमण बढ़ रहा है, इसमें तेजी आएगी।  वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि भले मौतें घट रही हों पर सरकार को अभी लागू पाबंदियों में ढील देने का विचार स्थगित कर देना चाहिए। गौरतलब है कि ब्रिटेन में 21 जून से पाबंदियों में ढील देने की योजना प्रस्तावित है। 

नए वेरिएंट ने बढ़ाया संक्रमण 
कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं सरकारी सलाहकार पैनल के सदस्य रवि गुप्ता ने कहा कि ब्रिटेन में मार्च अंत में संक्रमण घटने लगा था पर वायरस के वेरिएंट बी16172 के कारण यहां अचानक संक्रमण में तेजी आ गई। यह वेरिएंट सबसे पहले भारत में पाया गया था और अब ब्रिटेन के कुल कोविड केसों में से 38.5% मरीज इसी वेरिएंट के हैं।

तेजी से टीका लगाने से कामयाबी 
ब्रिटिश सरकार ने मौतों के आंकड़ों में आयी रिकॉर्ड गिरावट के पीछे तेज टीकाकरण को अहम कारण बताया है। आवर वर्ल्ड इन डाटा के मुताबिक, यहां अब तक 3.9 करोड़ लोगों यानी 75 प्रतिशत वयस्क आबादी को टीके की पहली खुराक मिल चुकी है। जबकि 2.5 करोड़ लोगों को दोनों खुराकें मिल चुकी हैं। 

लोगों की जुबानी: अपनी जरूरतों को समेट लिया 
बर्मिंघम के एचबेस्टन में परिवार के साथ रहने वालीं दिव्या उपाध्याय कहती हैं, यहां लॉकडाउन बहुत सख्ती के साथ लगाया गया। अगर आप बेवजह बाहर पकड़े गए तो 800 पाउंड (करीब 83 हजार रुपये) तक का भारी भरकम जुर्माना लग सकता है। बात जुर्माने की नहीं है, हम लोगों ने पूरी गंभीरता से लॉकडाउन का पालन किया। वैसे तो जरूरी सामान लेने के लिए हमें बाहर निकलने की इजाजत थी मगर हम नहीं निकले हमने अपनी जरूरत का लगभग हर सामान ऑनलाइन माध्यम से मंगाया और हां अपनी जरूरतें भी छोटी कीं, गैर जरूरी खरीदारी तक से परहेज किया। वैसे सरकार ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि किसी को नाहक परेशाना न हो। हमें हर सप्ताह सात रैपिड किट पहुंचा दी जाती हैं, ताकि अगर परिवार में किसी को भी शक हो तो तुरंत अपनी जांच कर सकें। हर सप्ताह प्रधानमंत्री का संदेश जारी होता है जिसमें ये बताया जाता है कि इस वक्त क्या हालात हैं और आगे क्या प्लान बन रहा है। एक और खास बात कि, यहां कभी बच्चों के क्रेच बंद नहीं किए। इसके पीछे एक वजह ये भी थी कि बच्चे दादा-दादी के संपर्क में कम आएं। यहां सामाजिक दूरी का पालन तो मानो धर्म की तरह होता है।

हमने लॉकडाउन का गंभीरता से पालन किया 
सेंट्रल लंदन में रह रहीं आईटी प्रोफेशनल भावना वर्मा कहती हैं, हमने लॉकडाउन का पालन पूरी गंभीरता से किया। सरकार का काम नियम बनाना है, लेकिन अगर आप खुद पर नियंत्रण नहीं करेंगे तो दिक्कतें होंगी। हमने और हमारे परिवार के लोगों ने इस बात को समझा और अपनाया। हम ही नहीं यहां कई भारतीय परिवार हैं, सभी ने संयम का पालन किया। लंदन में लोगों ने काफी समझदारी दिखाई। नियम अपनी जगह थे, लेकिन लोगों ने खुद ही सब कुछ नियंत्रण में रखा। बेवजह न तो बाहर निकले, न ही किसी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने वर्कफॉर्म होम को ही प्राथमिकता दी। ऑनलाइन शॉपिंग में भी समझदारी दिखाई। जरूरत भर का सामान ही मंगवाया। भारत के लोगों को भी इस तरह की समझदारी दिखाने की जरूरत है। सरकार आपके लिए ही कड़े नियम बना रही है, लेकिन आप खुद को समझदार बनाकार खुद को और देश को बचा सकते हैं।
 



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