Cold blooded murder of pregnant elephant (1)
Cold blooded murder of pregnant elephant in Keral India

हम किस दिशा में जा रहे हैं
संवेदनहीनता समाज से गायब होती जा रही है। लोग भौतिकता के फेर में इस कदर फंस गये है कि इंसानियत केवल किताबों के पन्नों में ही देखने को मिलती है। एक समय यह कहा जाता था कि भारत वो देश है जहां गलती से भी चींटी मर जाने पर लोग लोग अफसोस करते थे। लेकिन आज लोगों के अंदर की इंसानियत खत्म हो गयी है। लोग क्षणिक मौज मस्ती के लिये किसी भी जानवर की नृशंस हत्या कर देते हैं। अगर ऐसा न होता तो आज गर्भवती हथिनी की दर्दनाक मौत न होती। उसका इतना कुसूर था कि वो अपने बच्चे की भूख से परेशान हो शहर में आ गयी थी। वैसे तो भारतीय संस्कृति में गज की पूजा की जाती है खास तौर से केरल में जहां हाथियों की कई मौकों पर पूजा की जाती है। वहां एक गर्भवती हाथिनी तड़प तड़प कर जान दे देती है। यही हमारा भारत है जो विश्व गुरु बनने का ख्वाब देख रहा है अगर है तो नही बनना हमें विश्व गुरु। हम पिछड़े ही भले जहां हम किसी भी जीव हत्या से पहले सौ बार सोचते है।
केरल के मलम्मापुरम में हुई इस हृदय विदारक वारदात न केवल भारत बल्कि विश्व भी दुख से डूब गया है। हर कोई अपनी संवदेनाएं जाहिर कर रहा है। कोई अपनी कविता के जरिये तो कोई चित्रों के जरिये। नेता से अभिनेता तक हर कोई अपनी श्रद्धांजलि पेश कर रहा लेकिन क्या ये पर्याप्त है हथिनी की मौत के साथ उसके बच्चे की भी अकाल मौत हो गयी है। क्या कोई उसकी पीड़ा वेदना को महसूस कर सकता है जो उसने तीन दिनों तक सहा। कैसे अपने अंदर की आग को ठंडा करने के लिये तीन दिनों तक नदी में बिताये। उस बेजुबान जानवर का दोष क्या था। उसे किस बात की सजा दी गयी। यह बात सच है कि यह घटना कुछ दिनों तक लोगों के जेहन में रहेगी। फिर लोग सामान्य रूप से जीवन जीने के आदि हो जायेंगे। अजीब फितरत है हम लोगों की घड़ियाली आंसू बहा कर अपना फर्ज निभात ​हैं। उस पर तुर्रा यह कि हम विश्व गुरु बनने जा रहे हैं।

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