पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी नीत मंत्रिमंडल में 7 नए चेहरों को शामिल किए जाने जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार में शामिल रहे 5 मंत्रियों को शामिल नहीं किए जान की संभावना है। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

नए मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों की अंतिम सूची तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री चन्नी ने शनिवार दोपहर करीब 12 बजकर 30 मिनट पर राजभवन में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की। राज्यपाल से मिलने के बाद चन्नी ने संवाददाताओं को बताया कि रविवार शाम चार बजकर 30 मिनट पर नए मंत्रियों के लिए शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन होगा।

दिल्ली से लौटने के कुछ घंटे बाद ही चन्नी ने राज्यपाल से मुलाकात की। दिल्ली में उन्होंने नए मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले चेहरों को लेकर पार्टी के आलाकमान के साथ अंतिम चरण की चर्चा की।  

सूत्रों के अनुसार परगट सिंह, राजकुमार वेरका, गुरकीरत सिंह कोटली, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, कुलजीत नागरा और राणा गुरजीत सिंह मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। वहीं पार्टी ने अमरिंदर सिंह सरकार में मंत्री रहे विजय इंदर सिंगला, मनप्रीत सिंह बादल, ब्रह्म मोहिंदरा, सुखबीर सिंह सरकारिया, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, अरुणा चौधरी, रजिया सुल्तान और भारत भूषण आशु को मंत्रिमंडल में बनाए रखने का फैसला लिया है।
     
सूत्रों ने बताया कि हालांकि अमरिंदर सिंह नीत मंत्रिमंडल में मंत्री रहे पांच विधायकों राणा गुरमीत सिंह सोढी, साधु सिंह धर्मसोत, बलबीर सिंह सिद्धू, गुरप्रीत सिंह कांगड़ और सुंदर शाम अरोड़ा का मंत्रिमंडल से पत्ता कट सकता है। राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ सदस्यों के साथ बैठक के बाद चन्नी नीत मंत्रिमंडल के नामों पर सहमति बनी। मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा करने के लिए चन्नी को कांग्रेस आलाकमान ने शुक्रवार को दिल्ली तलब किया था। मुख्यमंत्री चन्नी और दो उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी समेत कुल 18 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। 

इनका कट सकता है पत्ता
 

पूर्व  मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पांच करीबी मंत्रियों की छुट्टी होने की संभावना है। इनमें साधु सिंह धर्मसोत, बलवीर सिद्धू, राणा गुरमीत सोढ़ी, गुरप्रीत कांगड़ और सुंदर शाम अरोड़ा हो सकते हैं। धर्मसोत पर पोस्टमैट्रिक छात्रवृत्ति में कथित तौर पर घोटाले के आरोप हैं। वहीं सोढी और अरोड़ा भी कैप्टन के खासमखास हैं। कांगड़ उनके दामाद को सरकारी नौकरी दिलाने के कारण निशाने पर रहे हैं। 



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