त्योहारी मांग बढ़ने और तिलहन की कमी की वजह से बीते सप्ताह दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सरसों, मूंगफली, सोयाबीन और सीपीओ सहित लगभग तेल- तिलहन के भाव सुधार दर्शाते बंद हुए। बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि देश में त्योहारी के साथ जाड़े के मौसम की मांग बढ़ रही है। सोयाबीन और मूंगफली की नई फसलें भी बाजार में आना शुरू हो गई हैं। हालिया बरसात से कुछ तिलहन फसलों को नुकसान भी हुआ है। इन सब परिस्थितियों के बीच तेल-तिलहन कीमतों में चौतरफा सुधार देखने को मिला है।
        
उन्होंने कहा कि देश में सरसों का अब 10-12 लाख टन का स्टॉक रह गया है जो ज्यादातर किसानों के ही पास है। सर्दियों के अलावा त्योहारी मांग लगातार बढ़ रही है और दीवाली के बाद सरसों की मांग और बढ़ेगी। ऐसी परिस्थिति में सलोनी शम्साबाद में सरसों का भाव बीते सप्ताह के अंत में 8,900 रुपये से बढ़ाकर 9,200 रुपये क्विंटल कर दिया गया। इससे समीक्षाधीन सप्ताह में सरसों तेल-तिलहन के भाव मजबूत हो गये। सूत्रों ने कहा कि सरसों की अगली फसल के आने में लगभग एक महीने की देर हो सकती है क्योंकि बिजाई देर से हुई है। लेकिन उत्पादन दोगुना होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर सरसों का स्थायी रूप से लगभग 5-10 लाख टन सरसों का स्टॉक रखना चाहिये।

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केन्द्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने शुक्रवार को कहा था कि सरसों में फरवरी में अगली फसल आने के बाद ही नरमी की संभावना है। उन्होंने कहा कि खाद्य तेलों की वैश्विक कीमतों में वृद्धि के कारण सरसों तेल की कीमतों पर असर पड़ा है। सूत्रों ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल के भाव मजबूत होने से मूंगफली की मांग बढ़ गई है जिसकी वजह से मूंगफली तेल-तिलहन के भाव मजबूत बंद हुए।
   
उन्होंने कहा कि सोयाबीन की नई फसल की आवक शुरू होने से पहले से ही वायदा कारोबार में इसके भाव कम हैं। नई फसल के आने के समय आमतौर पर भाव गिराया जाता है और ऐसे में किसानों को कम दाम पर अपनी फसल बेचने पर मजबूर होना पड़ता है। सोयाबीन की नई फसल की मंडियों में आवक कम है और किसान नीचे भाव पर बिकवाली से बच रहे हैं। इससे समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन तेल-तिलहन के भाव मजबूत बंद हुए।
   
समीक्षाधीन सप्ताह में मलेशिया एक्सचेंज में मजबूती रहने से कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन के भाव भी मजबूत रहे। जबकि त्योहारी मांग से बिनौला तेल में भी सुधार आया।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाने का भाव 145 रुपये सुधरकर 8,870-8,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गया, जो पिछले सप्ताहांत 8,730-8,755 रुपये प्रति क्विंटल था। सरसों दादरी तेल का भाव पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 450 रुपये बढ़कर समीक्षाधीन सप्ताहांत में 18,000 रुपये क्विंटल हो गया। सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल की कीमतें 40-40 रुपये बढ़कर क्रमश: 2,705-2,745 रुपये और 2,780-2,890 रुपये प्रति टिन हो गईं।
        
त्योहारी मांग के कारण समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन दाने का भाव 50 रुपये का लाभ दर्शाता 5,300-5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ जबकि सोयाबीन लूज के भाव 5,050-5,150 रुपये क्विंटल के पूर्वस्तर पर बने रहे। सुधार के आम रुख के कारण सोयाबीन दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम के भाव क्रमश: 370 रुपये, 420 रुपये और 380 रुपये का लाभ दर्शाते क्रमश: 14,050 रुपये, 13,670 रुपये और 12,580 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
        
समीक्षाधीन सप्ताहांत में बिनौला तेल में आई तेजी से मूंगफली की मांग बढ़ गई और मूंगफली का भाव समीक्षाधीन सप्ताहांत में 15 रुपये सुधरकर 6,300-6,385 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। मूंगफली गुजरात का भाव 15 रुपये लाभ के साथ 14,315 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। जबकि मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड का भाव 10 रुपये के सुधार के साथ 2,090-2,220 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ। समीक्षाधीन सप्ताहांत में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 300 रुपये के सुधार के साथ 11,450 रुपये क्विंटल हो गया। जबकि पामोलीन दिल्ली तथा तथा पामोलीन कांडला तेल के भाव क्रमश: 160 रुपये और 60 रुपये का लाभ दर्शाते क्रमश: 13,060 रुपये और 11,860 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।समीक्षाधीन सप्ताहांत में बिनौला तेल का भाव 450 रुपये बढ़कर 13,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।



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