लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 किए जाने के प्रस्ताव को समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अबु आजमी ने जनसंख्या नियंत्रण की कोशिश से जोड़ दिया है। उन्होंने यह कहकर भी विवाद खड़ा कर दिया है कि इस कानून को वे लोग ला रहे हैं, जिनके अपने बच्चे नहीं हैं। उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा पीएम नरेंद्र मोदी की ओर था। 

अबू आजमी ने न्यूज चैनल नेटवर्क 18 से बातचीत में आजमी ने इस प्रस्ताव को लेकर कहा कि जिनके लड़के-लड़की नहीं है उन्हें इसके बारे में क्या पता। उन्होंने कहा कि कानून बनाने में उन लोगों की राय लेनी चाहिए, जिनके बच्चे हैं। गांवों और आदिवासी इलाकों के लोगों से पूछना चाहिए। एंकर ने जब उनसे पूछा कि वह किसके लिए ऐसा कह रहे हैं कि ‘जिसके बच्चे नहीं है’, इसके जवाब में पहले तो आजमी ने कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं, लेकिन फिर पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘समझने वाले समझ गए, जो ना समझे वो अनाड़ी हैं।’

अबु आजमी ने कहा, ”बच्चों की भलाई मां-बाप अच्छी तरह जानते हैं, सरकार क्या भलाई करेगी। मां-बाप को महसूस होगा कि बच्चे बड़े हो गए हैं, अब शादी हो जानी चाहिए, मेरी बच्ची बड़ी हो गई है… अगर नहीं होगी तो बच्ची गलत रास्ते पर जा सकती है। अभी शादी मिल गई है, आगे ना मिले, लड़के वाले रुकने को तैयार ना हों, तो ऐसी स्थिति में सरकार जिम्मेदारी ले। यह बिल्कुल गलत है।” 

जनसंख्या नियंत्रण की कोशिश
अबु आजमी ने कहा कि सरकार जनसंख्या नियंत्रण के लिए इस तरह का कानून बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनसंख्या बढ़ाने या घटाने की जगह विकास पर ध्यान देना चाहिए। इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य फिरंगी महली ने भी कहा है कि लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाना स्वीकार्य नहीं है।

क्या है सरकार का प्लान
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से महिलाओं की विवाह की उम्र मौजूदा 18 से बढाकर 21 वर्ष करने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि महिलाओं में कुपोषण की समस्या को देखते हुए सरकार इस योजना पर काम कर रही है कि उनका विवाह सही उम्र में हो। महिलाओं की विवाह की उम्र कम करने के लिए सरकार को मौजूदा कानून में संशोधन करना होगा और इसके लिए संसद में विधेयक लाया जायेगा। अभी देश में पुरूषों की विवाह की उम्र 21 वर्ष जबकि महिलाओं के विवाह की उम्र 18 वर्ष है।  



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