Edited By Ashok Upadhyay | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
- LAC और मिलिट्री स्तर पर चल रही मीटिंग के बारे में चर्चा हुई
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इससे पहले 8 जून को मीटिंग ली थी
- LAC पर बुधवार को मेजर जनरल स्तर की मीटिंग हुई थी
- विवादित क्षेत्रों में अब भी भारत और चीनी सेनाओं की मौजूदगी
नई दिल्ली
लद्दाख में बढ़े तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सीडीएस , आर्मी चीफ, नेवी चीफ और एयरफोर्स चीफ के साथ मीटिंग की। इस दौरान LAC के बारे में और मिलिट्री स्तर पर चल रही मीटिंग के बारे में चर्चा हुई। इससे पहले 8 जून को रक्षा मंत्री ने मीटिंग ली थी। जिसके बाद LAC पर बुधवार को मेजर जनरल स्तर की मीटिंग हुई थी।
सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री, सीडीएस और सेना प्रमुखों ने दोनों पक्षों के कमांडरों की हाल की बैठकों के बाद किए गए नए आंकलन की जमीनी स्थिति पर चर्चा की। सूत्रों का कहना है कि चीनी और भारतीय सेनाओं ने विवादित क्षेत्रों से अपने सैनिकों को वापस हटा लिया है, लेकिन दोनों सेनाओं की अभी भी इस क्षेत्र में काफी उपस्थिति है।
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कमांडर लेवल मीटिंग ने दिखाया असर
पिछले हफ्ते लद्दाख में हुई मिलिट्री कमांडर लेवल मीटिंग ने असर दिखाया है। अब चीन शांति से पूरे विवाद को सुलझाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बीते रविवार को कहा कि दोनों पक्ष ‘द्विपक्षीय समझौतों के मुताबिक सीमाई इलाकों में स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान पर सहमत’ हैं। MEA के मुताबिक, दोनों देशों के बीच मिलिट्री कमांडर लेवल की बातचीत बेहद शांतिपूर्ण और गर्मजोशी से भरे माहौल में हुई। चीन ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर पिछले कुछ हफ्तों से आक्रामक रुख अपनाया हुआ था। कई दौर की बातचीत अबतक बेनतीजा रही थी।
विदेश मंत्रालय ने जारी किया था बयान
एक छोटा बयान जारी करते हुए MEA ने कहा था कि दोनों देशों के मिलिट्री कमांडर्स इस बात पर सहमत हुए कि पूर्वी लद्दाख में जारी सीमा विवाद का हल शांतिपूर्वक, द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर निकाला जाएगा। द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण विकास के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्र में शांति आवश्यक है। मंत्रालय ने कहा था कि दोनों पक्षों ने डिप्लोमेटिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ को भी याद किया।
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चीन बढ़ा रहा क्षमता, भारत भी जैसे को तैसा के मूड में
भारत और चीन के बीच पिछले महीने गतिरोध की शुरुआत हुई थी। पूर्वी लद्दाख में 5 और 6 मई को दोनों देशों के करीब 250 सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। 9 मई को उत्तरी सिक्किम में भी इसी तरह की घटना हुई थी। चीन के सैनिकों ने लद्दाख में कई पॉइंट्स पर आक्रामक रुख अपनाया जिसका जवाब भारत को देना पड़ा। फिर भारत ने फैसला किया कि पैंगोंग सो, गलवान वैली, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी जैसे सभी विवादित जगहों पर चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए भारतीय सैनिक मजबूत रुख अपनाएंगे। सैटलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ने एलएसी से सटे इलाकों में बड़े पैमाने पर डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया है।







