Upendra Kushwaha may return to BJP as member of NDA in Bihar
Upendra Kushwaha may return to BJP as member of NDA in Bihar

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बिहार के राजनीति में नितीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा में एक समानता है। दोनों ही अपने फैसलों से हर बार चौंका देते हैं। जहांं नितीश कुमार पाला बदल चुके है वहीं उपेंद्र कुशवाहा भी 15 साल के राजीतिक सफर में आठ बार पल्टी मार चुके हैं। शायद यही वजह है कि दोनों नेता कई बार साथ आ चुके हैं।

JDU Leader Upendra Kushwaha takes on CM Nitish kumar that Nitish is being weak in Politics.
Politician Upendra Kushwaha once again ditched to CM Nitish kumar in Bihar Politics

उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर अपनी नई पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल के गठन की घोषणा कर दी है। वे इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मनोनीत किए गए हैं। उन्हें नई पार्टी के सभी बड़े फैसले लेने के लिए अधिकृत किया गया है। हालांकि, इससे साथ ही एक तथ्य भी फिर सामने आ गया है कि नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा दोनों ही अचानक अपना मन परिवर्तन करते हैं। इस बार जदयू छोड़ने और नई पार्टी बनाने की घोषणा करने के बाद वर्ष 2002 से अब तक उपेंद्र कुशवाहा 8वीं बार राजनीतिक पाला बदल चुके हैं।

कुशवाहा पिछले 15 सालों में 7 बार पलटी मार चुके हैं

उपेंद्र कुशवाहा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 1985 से की है। इस बार नई पार्टी बनाने से पहले उपेंद्र कुशवाहा पिछले 15 सालों में 7 बार पलटी मार चुके हैं। मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे कुशवाहा 2 बार अपनी पार्टी भी बना चुके हैं। अब इस बार उन्होंने तीसरी बार नई पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल बनाई है। आइये देखते हैं कि कुशवाहा ने कब कब पाला बदला है।

उपेंद्र कुशवाहा ने कब-कब पलटी मारी?
वर्ष 2007- बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे उपेंद्र कुशवाहा ने 2007 में पहली बार जेडीयू से बगावत कर दी थी। कुशवाहा के बगावती तेवर को देखते हुए जेडीयू ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। कुशवाहा इसके बाद खुद की राष्ट्रीय समता पार्टी बनाई। वर्ष 2009- लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने फिर से पाला बदला और नीतीश कुमार से जाकर मिल गए. इस बार नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया।

उपेंद्र कुशवाहा ने 2018 में मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया
वर्ष 2013- जेडीयू और बीजेपी में तनातनी के बीच उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश को झटका देने के लिए फिर से पार्टी छोड़ दी। इस बार उन्होंने फिर से अपनी खुद की नई पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी बनाई। उपेंद्र कुशवाहा ने वर्ष 2014 में बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया और लोकसभा में 4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। कुशवाहा बिहार में 3 सीट जीतने में कामयाब रहे। उन्हें मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाया गया। मोदी सरकार से जातीय जनगणना आदि मुद्दे पर विरोध के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने 2018 में मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। कुशवाहा एनडीए छोड़ राजद-कांग्रेस के नेतृत्व वाली महागठबंधन में शामिल हो गए।

तीसरा मोर्चा बनाया
वर्ष 2019-लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने महागठबंधन का साथ छोड़ दिया। उन्होंने बसपा और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ मिलकर तीसरा मोर्चा बनाया। 2020 में बिहार चुनाव में तीसरा मोर्चा भी पूरी तरह फेल हो गया। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी का जेडीयू में विलय कर लिया। इस बार जदयू छोड़ने के बाद उन्होंने 8वीं बार पलटी मारी है और नई पार्टी का गठन कर लिया है। बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधानपरिषद् यानी चारों सदन के सदस्य रहे हैं।

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