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आजादी के बाद जब नेहरू जी देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने तो उनके कंधों पर देश भर की भारी और विकराल समस्याएं मुंह बाये खड़ी थी। उन समस्याओं को हल करने के लिये सरकार अथक प्रयास करने में जुटी हुई थी। 1955 में एक दिन संसद भवन में प्रवेश कर रहे थे। आसपास काफी लोग खड़े थे। भीड़ ने उनको घेर लिया। उन दिनों पीएम की सुरक्षा में इतनी सुरक्षा गारद मुस्तैद नहीं होती थी।

अक्सर संघ और बीजेपी की ओर से उनके चरित्र हनन की कोशिशें की जाती हैं। ये सब उनकी सादगी और सदव्यवहार कुशलता के कारण जलन में किया जाता है। नेहरू जी की ख्याति न केवल भारत में बल्कि विदेशों में फैली थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी उनके आदर्श थे। गांधी जी उनके सद व्यवहार और विनम्रता के कायल थे। आजादी के बाद प्रधानमंत्री पद के लिये नेहरू जी बापू की पहली पसंद थे। उनकी प्रतिभा और विदेश नीति की जानकारी विशेष रूप से बापू को प्रभावित करती थी। उन्हें इस बात का भरोसा था कि वो देश की सभी समस्याओं को बड़ी सूझबूझ से हल निकालने में सक्षम रहेंगे। नेहरू जी ने अपने को देश का प्रधानसेवक कहलवाया था।
नेहरू जी के कपड़े पेरिस धुलने जाते थे!
जैसा कि सबको मालूम है कि प्रधानमंत्री नेहरू खानदानी रईस थे। उनके पिता मोती लाल नेहरू एक नामी वकील थे। उन्होंने विदेश से वकालत व बैरिस्टर की डिग्री ली थी। नेहरू जी का बचपन काफी रईसी में गुजरा यह भी कहा जाता है कि जब वो इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहे थे तो कालेज के हर गेट पर शानदार कार उनका इंतजार करती थी। पता नहीं किस गेट से वो बाहर आयें और उन्हें कार का इंतजार न करना पड़े। संघ और बीजेपी के लोग अक्सर यह अफवाह उड़ाया करते हैं कि नेहरू जी के कपड़े धुलाई के लिये पेरिस जाते थे। यह बिल्कुल बेबुनियाद और तथ्यहीन अफवाह है। जब इस बात की गहन छानबीन की गयी तो पता चला कि दिल्ली में ही एक लॉन्ड्री थी जिसका नाम पेरिस लॉन्ड्री था वहां धुलाई के लिये नेहरू जी के कपड़े जाया करते थे। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है संघ और बीजेपी के नेता किस कदर दूसरों को बदनाम करने की साजिशें रचते हैं। दरअसल बात यह है कि संघ और भाजपा के नेता नेहरू जी के आगे कहीं नहीं टिकते थे न योग्यता में और न ही लोकप्रियता में। आज भी पीएम मोदी और उनकी सरकार के मंत्री नेहरू जी के बारे में गलतफहमी पैदा करने से नहीं चूकते है।
जब बूढ़ी औरत ने संसद परिसर में नेहरू जी का कालर पकड़ लिया
आजादी के बाद जब नेहरू जी देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने तो उनके कंधों पर देश भर की भारी और विकराल समस्याएं मुंह बाये खड़ी थी। उन समस्याओं को हल करने के लिये सरकार अथक प्रयास करने में जुटी हुई थी। 1955 में एक दिन संसद भवन में प्रवेश कर रहे थे। आसपास काफी लोग खड़े थे। भीड़ ने उनको घेर लिया। उन दिनों पीएम की सुरक्षा में इतनी सुरक्षा गारद मुस्तैद नहीं होती थी। उसी भीड़ में एक बूढ़ी औरत बहुत गुुस्से में नेहरू जी के करीब आयी और देखते ही देखते उसने नेहरू जी का गिरेबां पकडते हुए पूछा कि उन्होंने गरीब और बेसहारा लोगों के लिये क्या किया। ये सब देखते हुए पीएम सुरक्षा में तेनात अंगरक्षकों ने उस महिला को रोकने का प्रयास किया। लेकिन नेहरू जी ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। नेहरू जी ने हंसते हुए कहा कि आपको संविधान ने इतना अधिकार तो दिया है कि आप आज देश के पीएम का गिरेबान पकड़ कर सवाल कर रही हैं। नेहरू जी की बात सुन कर बूढ़ी औरत का गुस्सा शांत हो गया और उसने नेहरू जी को गले लगाते हुए दुआएं दीं। आज के समय में किसी की हिम्मत हो सकती है जो पीएम का गिरेबान पकड़ कर सवाल कर सके।








