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चुनाव की घोषणा क्या हुई कि राजीतिक दलों में आया राम गया राम शुरू हो गया है। एक तरफ कांग्रेस के नेता भाजपा में जा रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा के अंदर भी खलबली शुरू हो गयी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि राजनीतिक दल भी एक दूसरे दल के नेताओं को शामिल करने से भी नहीं चूकते रहे हैं। पार्टी के नेता दल बदल करते समय हर नेता यही कहता है कि वो दल की नीतियों से प्रभावित होकर अंतरात्मा की आवाज पर शामिल हुआ है। जो नेता कई सालों तक दूसरे दलों के नेता और सरकार को पानी पी पी कर कोसता रहा अचानक उनके समर्थन में कसीदे पढ़ने लगता है। वैसे आम तौर पर यह चर्चा होती है कि दल बदल सत्ता और मलाई काटने के लिये किया जाता है।
कैसे बनेगी संबित पात्रा और गौरव वल्लभ की
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो.गौरव वल्लभ ने पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा पद की लालच या विचारधारा से असहज….? याद दिला दें, गौरव वल्लभ वही व्यक्ति हैं जिनका बीजेपी के नेता संबित पात्रा के साथ एक वीडियो वायरल हुआ था कि आप पांच ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी की बात करते हैं तो बस इतना बता दीजिए कि ‘ एक ट्रिलियन मे कितने जीरो होते हैं…’। इसके लिए देखते हैं कि वह अपने इस्तीफा मे क्या कारण बताएं हैं….
प्रो वल्लभ ने क्यों बदला दल
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में अपना इस्तीफा पोस्ट करते हुए पार्टी छोड़ने का कारण भी बताया है…. गौरव वल्लभ ने पत्र में और क्या लिखा? 1. अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा में कांग्रेस पार्टी के स्टैंड से मैं क्षुब्ध हूं. मैं जन्म से हिंदू और कर्म से शिक्षक हूं. पार्टी के इस स्टैंड ने मुझे हमेशा असहज किया, परेशान किया. पार्टी और गठबंधन से जुड़े कई लोग सनातन के विरोध में बोलते हैं, और पार्टी का उसपर चुप रहना, उसे मौन स्वीकृति देने जैसा है। 2. इन दिनों पार्टी गलत दिशा में आगे बढ़ रही है। एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं। यह कार्यशैली जनता के बीच पार्टी को एक खास धर्म विशेष के ही हिमायती होने का भ्रामक संदेश दे रही है। यह कांग्रेस के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। 3. आर्थिक मामलों पर वर्तमान समय में कांग्रेस का स्टैंड हमेशा देश के वेल्थ क्रिएटर्स को नीचा दिखाने का, उन्हें गाली देने का रहा है। आज हम उन आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी) नीतियों के खिलाफ हो गए हैं, जिसको देश में लागू कराने का पूरा श्रेय दुनिया ने हमें दिया है। देश में होने वाले हर विनिवेश पर पार्टी का नजरिया हमेशा नकारात्मक रहा। क्या हमारे देश में बिजनेस करके पैसा कमाना गलत है? मैं सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर को गाली नही दे सकता हूंबता दे कि गौरव वल्लभ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे, वह देश के एक शैक्षणिक संस्थान में बिजनेस के प्रोफेसर हैं एवं आरबीआइ के पूर्व निदेशक रह चुके हैं। उन्होंने लिखा मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहा हूं. व्यक्तिगत रूप से मैं आपसे मिले स्नेह के लिए हमेशा आभारी रहूंगा.उनके पत्र को पढ़ने के बाद लगता है कि ब्राह्मण हिंदू होने के कारण कांग्रेस को कट्टर धार्मिक नही पाते हैं।
अचानक उद्योपतियों और सरकार से स्नेह क्यों
सवर्ण जाति से सम्बन्ध रखने के कारण कांग्रेस के जातीय जनगणना से असहज महसूस कर रहे थे, जो कि कांग्रेस का दलितों, पिछड़ों के सामाजिक न्याय के प्रति नई पहल है। वित्त प्रोफेसर होने से उनकी आर्थिक नीति उद्योगपतियों के पक्ष में जाती है। धर्म, जाति एवं उद्योगपतियों के प्रति आलिंगन ,गुणगान उन्हें भाजपा मे ही मिल सकता है… कांग्रेस मे नही…. ऐसे सवर्ण जो धार्मिक, जातीय मानसिकता रखते होंगे। धीरे धीरे कांग्रेस से निकलते चले जायेंगे… क्योंकि यह राहुल गांधी की न्यू कांग्रेस है, जिसकी वैचारिकता स्वतन्त्रता, समता, बंधुत्व, न्याय है…. आर्थिक दर्शन.. समावेशी, टिकाऊ है।गौरव वल्लभ का इस्तीफा भाजपा मे शामिल होना, पद की लालच….? या कांग्रेस की बदली विचारधारा से असहज होना है….?

Vishwajit Singh
स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक

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