क्या राहुल गांधी देश को संभाल सकते हैं
क्या मोदी शाह को राहुल गांधी से डरते हैं
राहुल गांधी को मोदी शाह पीएम बनने से रोक सकते हैं।
अगर राहुल गांधी जनप्रिय नेता हैं तो चुनाव मेें कांग्रेस हारती क्यों
क्या राहुल कभी देश के पीएम बन सकेंगे
राहुल गांधी फिर फ्लॉप साबित हुए!
क्या कांग्रेस केवल राहुल के भरोसे है!
आप क्या सोचते हैं कि देश की सभी राजनीतिक दल खत्म हो जायेंगे!
देश में केवल सत्ता धारी दल ही रहेगा!
देश पर भाजपा का एकछत्र राज रहेगा!
क्या कांग्रेस केवल राहुल के भरोसे है!
जैसे भाजपा को केवल मोदी का सहारा
अगर पिछले दस 11 साल का अवलोकन किया जाये तो साफ दिखेगा कि देश की दोनों राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस और भाजपा केवल अपने दो नेताओं के भरोसे सत्ता में बनी रहना चाहती हैंं। नमूने के तौर पर भाजपा का सारा दारोमदार नरेंद्र मोदी पर है तो कांग्रेस केवल राहुल गांधी के सहारे सत्ता में वापसी करना चाहती है। जहां भाजपा तो नरेंद्र मोदी को कैश करने में सफल है वहीं कांग्रेस के राहुल गांधी भारी मशक्कत करने के बावजूद आशानुरूप सफलता नहीं मिल रही है।
आम चुनाव में राहुल गांधी के व्यक्तित्व का असर दिखा। लेकिन दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र के चुनावों में कांग्रेस को भारी नुकसान कांग्रेस को झेलना पड़ा। सबसे ज्यादा नुकसान दिल्ली के चुनावों में देखने को मिला है। दिल्ली में कांग्रेस ने इंडिया ब्लाक के साथी आम आदमी पार्टी के खिलाफ जमकर प्रचार किया।

लेकिन अफसोस की बात है कि इस बार भी एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई। इससे कांग्रेस को भारी आलोचना को सामना करना पड़ा है। एक बात और है कि कांग्रेस को ऐसे नेताओं के बारे में सोचना होगा जो केवल अपने बाप दादाओं के कामों के बल पर पार्टी में सुख भोग रहे हैं। दिल्ली में जिस तरह से कुछ नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बयान बाजी की उसी का नतीजा कांग्रेस को झेलना पड़ा है। कांग्रेस को आत्ममंथन की सख्त जरूरत है।
भाजपा ने उठाया आप और कांग्रेस की खींचतान का फायदा
को मिला है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। जहां कांग्रेस को तो विधानसभा चुनाव में कोई फायदा तो नहीं हुआ लेकिन कांग्रेस के हाथ इस बार भी खाली रहे। उनके सभी 70 उम्मीदवार चुनाव में हार गये। यहां तक कि पूर्व सीएम शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित और महिला कांग्रेस अध्यक्ष भी चुनाव हार गयीं। संदीप दीक्षित ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। अल्का लांबा ने सीएम आतिशी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
राहुल गांधी फिर फ्लॉप साबित हुए!
आतिशी तो कालका जी से किसी तरह जीत गयीं। लेकिन अरविंद केजरीवाल बीजेपी के बिछाये जाल में फंस गये। नयी दिल्ली विधानसभा से भाजपा के प्रवेश वर्मा ने जीत हासिल की। लेकिन संदीप दीक्षित कही भी अरविंद केजरीवाल को चुनौती देत नहीं दिखे। वहां सीधा मुकाबला आप और भाजपा के बीच ही था। लेकिन कांग्रेस के उतारे गये उम्मीदवारों ने आम आदमी पार्टी का खेेल बिगाड़ दिया। कांग्रेस को दिल्ली विधानसभा चुनाव में 2 पतिशत ही वोट मिले। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार बहुत ही कम वोटों के अंतर से भाजपा से हारे हैं।
दो विल्लियों की लड़ाई में बंदर ने फायदा उठाया
यह कहा जा सकता है कि दो बिल्लियों की लड़ायी में बंदर ने मौके का फयदा उठा लिया। मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल बहुत हीी कम वोटों के अंतर हारे। लेकिन आप के सभी दिग्गज नेता चुनाव हार गये। जिससे पार्टी का मनोबल कम हो गया।

लेकिन यह भी सच है कि जिस तरह चुनाव प्रचार और वोटिंग के दौरान दिल्ली पुलिस और चुनाव आयोग की करतूतों का खुलासा हुआ। यह साफ हो गया कि इस बार भी भाजपा दिल्ली नहीं जीत सकती थी अगर कांग्रेस और आप आपस में नहीं टकराते। भाजपा के लिये सबसे बड़ी समस्या तो इस बात की है कि दिल्ली चुनाव में उन्होंने बहुत सारे ऐसे वादे कर दिये हैं जिन्हें पूरा करने में उनकी सांसें ऊपर हो रही हैं।
अभी दिल्ली के सीएम पर कोई नाम तय नहीं हुआ है। उनका वादा था कि उनकी सरकार बनने पर पहली विधानसभा बैठक में सरकार किये गये वादे पूरे कर दिये जायेंगे।
राहुल गांधी की सारी मेहनत बेकार रही!
राहुल गांधी ने पिछले दो सालों में पूरे देश में जो भारत जोड़ो यात्रा और भारत न्याय चात्रा कर देश भ्रमण किया उसका फायदा उन्हें लोकसभा के चुनावों जरूर मिला लेकिन विधानसभा चुनावों में मेहनत करने के बाद भी जीत का स्वाद चखने को नहीं मिला। उनकी रैलियों और जनसभाओं में भीड़ तो उमड़ती दिखी लेकिन उनकी योजनाओं पर मतदाताओं ने विश्वास नहीं किया। हरियाणा में जिस तरह से प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में चुनाव के समय अंदरूनी कलह दिखी। उसका फायदा भाजपा उठाया। यह बात भी सही है कि चुनाव आयोग और शासन प्रशासन ने चुनाव को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसका सीधा असर चुनाव पर पड़ा भाजपा हारते हारते जीत गयी और कांग्रेस की जीत हार में तब्दील हो गयी।







