कोरोना महामारी के कारण 25 मार्च से 31 मई तक चले लॉकडाउन के बाद भारत जैसे ही अनलॉक हुआ जून के दूसरे सप्ताह में आश्चर्यजनक रूप से बेरोजगारी दर में कमी आ गई। राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 14 जून को समाप्त सप्ताह में 11.63% तक तेजी से गिर गई। यह आंकड़ा सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा एक सर्वेक्षण से मिला है।
22 मार्च को देश मे बेरोजगारी दर 8.41 फीसद थी, जो कोरोना महमारी के चलते लॉकडाउन में 5 अप्रैल को बढ़कर 23.38 फीसद हो गई। वहीं 11 मई को यह 24.0 फीसद पर पहुंच गई। अब जब लॉकडाउन में बहुत सारी ढील दे दी गई तो यह घटकर 11.63 पर आ गई है। अगर शहरी क्षेत्र की बात करें तो 22 मार्च को बेरोजगारी दर 8.66 फीसद थी जो 5 अप्रैल को बढ़कर 30.93 फीसद पर पहुंच गई थी। वहीं यह 17 मई को 26.95 फीसद थी। जबकि, 14 जून को यह गिरकर 13.10 रह गई है।
यह भी पढ़ें: वित्त मंत्री की प्राइवेट बैंकों को दो टूक, आपात कर्ज सुविधा गारंटी योजना तेज करें
जहां तक ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो 22 मार्च को यह 8.29 फीसद थी 5 अप्रैल तक आते-आते 20.21 पर पहुंच गई। लॉकडाउन का असर शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में असर थोड़ा कम रहा और 17 मई को बेरोजगारी दर 22.79 फीसद पर पहुंच गई, जबकि इसी दौरान शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी दर 26.95 फीसद थी। अब 14 जून को यह गिरकर 10.96 फीसद पर आ गई है।
यह भी पढ़ें: कोरोना मामलों की संख्या 3 लाख 43 हजार के पार, 10 हजार के पास मौतें
इस मामले में इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अरूप मित्रा कहते हैं, “जो लोग पहले मजदूरी करते थे, वे अब गाँवों में चले गए हैं और अब या तो आकस्मिक काम या कृषि-कार्य में हैं। मासिक वेतन या ऑफिस सपोर्ट स्टाफ वाले ड्राइवर जो नौकरी छूटने और वेतन की हानि के कारण वापस चले गए हैं, वे रोजगार वालों के रूप में गिने तो जाएंगे पर तकनीकी रूप से उन्हें नियोजित कहा जाएगा।







